नैना देवी चालीसा - Maa Naina Devi Chalisa PDF
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नैना देवी चालीसा - Maa Naina Devi Chalisa PDF

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नैना देवी मां दुर्गा का एक रूप मानी जाती है। माँ नैना देवी का प्रमुख मंदिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित है जो एक शक्तिपीठ हैं।…

नैना देवी मां दुर्गा का एक रूप मानी जाती है। माँ नैना देवी का प्रमुख मंदिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित है जो एक शक्तिपीठ हैं। मां नैना देवी के आशीर्वाद से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है, भक्त के शरीर में दिव्य ऊर्जा का प्रवाह होता है, तथा भक्त की आध्यात्मिक उन्नति होती है।

आइये इस लेख मे हम मां नैना देवी चालीसा के बारे में जानते है और साथ ही हम मां नैना देवी के आशीर्वाद के महत्त्व तथा शक्तिपीठ के बारे में जानते है। इस लेख में आगे बढ़ने से पहले आप माता की अन्य चालीसा भी देख सकते हो जैसे मां काली चालीसा, मां शाकंभरी देवी चालीसा, दुर्गा चालीसा, ललिता माता चालीसा, कामाख्या चालीसा और मां पार्वती चालीसा।

नैना देवी चालीसा (Maa Naina Devi Chalisa)

---। दोहा ।---

नैनों में बसती छवि दुर्गे नैना मात।
प्रातः काल सिमरन करू हे जग की विख्यात।।___१

सुख वैभव सब आपके चरणों का प्रताप ।
ममता अपनी दीजिए माई, मैं बालक करूं जाप।।___ २

---।। चौपाई ।।---

नमस्कार हैं नैना माता। दीन दुखी की भाग्य विधाता।।
पार्वती ने अंश दिया हैं। नैना देवी नाम किया हैं।।१।।

दबी रही थी पिंडी होकर। चरती गायें वहा खडी होकर।।
एक दिन अनसुईया गौ आई। पिया दूध और थी मुस्काई।।२।।

नैना ने देखी शुभ लीला । डर के भागा ऊँचा टीला ।।
शांत किया सपने में जाकर । मुझे पूज नैना तू आकर ।।३।।

फूल पत्र दूध से भज ले । प्रेम भावना से मुझे जप ले ।।
तेरा कुल रोशन कर दूंगी । भंडारे तेरे भर दूंगी ।।४।।

नैना ने आज्ञा को माना । शिव शक्ति का नाम बखाना ।।
ब्राह्मण संग पूजा करवाई । दिया फलित वर माँ मुस्काई।।५।।

ब्रह्मा विष्णु शंकर आये । भवन आपके पुष्प चढ़ाए ।।
पूजन आये सब नर नारी । घाटी बनी शिवालिक प्यारी ।।६।।

ज्वाला माँ से प्रेम तिहारा । जोतों से मिलता हैं सहारा ।।
पत्तो पर जोतें हैं आती । तुम्हरें भवन हैं छा जाती ।।७।।

जिनसे मिटता हैं अंधियारा । जगमग जगमग मंदिर सारा ।।
चिंतपुर्णी तुमरी बहना । सदा मानती हैं जो कहना ।।८।।

माई वैष्णो तुमको जपतीं । सदा आपके मन में बसती ।।
शुभ पर्वत को धन्य किया है । गुरु गोविंद सिंह भजन किया है ।।९।।

शक्ति की तलवार थमाई । जिसने हाहाकार मचाई ।।
मुगलो को जिसने ललकारा । गुरु के मन में रूप तिहारा ।।१०।।

अन्याय से आप लड़ाया । सबको शक्ति की दी छाया ।।
सवा लाख का हवन कराया । हलवे चने का भोग लगाया।।११।।

गुरु गोविंद सिंह करी आरती । आकाश गंगा पुण्य वारती।।
नांगल धारा दान तुम्हारा । शक्ति का स्वरुप हैं न्यारा ।।१२।।

सिंह द्वार की शोभा बढ़ाये। जो पापी को दूर भगाए ।।
चौसंठ योगिनी नाचें द्वारे। बावन भेरो हैं मतवारे ।।१३।।

रिद्धि सिद्धि चँवर डुलावे। लंगर वीर आज्ञा पावै।।
पिंडी रूप प्रसाद चढ़ावे । नैनों से शुभ दर्शन पावें।।१४।।

जैकारा जब ऊँचा लागे । भाव भक्ति का मन में जागे ।।
ढोल ढप्प बाजे शहनाई । डमरू छैने गाये बधाई।।१५।।

सावन में सखियन संग झूलों। अष्टमी को खुशियों में फूलो ।।
कन्या रूप में दर्शन देती । दान पुण्य अपनों से लेतीं।।१६।।

तन मन धन तुमको न्यौछावर । मांगू कुछ झोली फेलाकर ।।
मुझको मात विपद ने घेरा। मोहमाया ने डाला फेरा।।१७।।

काम क्रोध की ओढ़ी चादर। बैठा हूँ नैया को डूबोकर।।
अपनों ने मुख मोड़ लिया हैं। सदा अकेला छोड़ दिया हैं।।१८।।

जीवन की छूटी है नैया। तुम बिन मेरा कौन खिवैया।।
चरणामृत चरणों का पाऊँ। नैनों में तुमरे बस जाऊं।।१९।।

तुमसे ही उद्धारा होगा। जीवन में उजियारा होगा।।
कलयुग की फैली है माया। नाम तिहारा मन में ध्याया।।२०।।

मां नैना देवी की कहानी

हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं के अनुसार जब सती माता का दुखद निधन हुआ था तब भगवन शिव उनके मृत शरीर को अपने कंधों पर उठाकर विनाश का तांडव नृत्य कर रहे थे।

उस समय भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र का उपयोग सती माता के शरीर को विच्छेद करके सृष्टि की रक्षा करी। माता का शरीर भारत के विभिन्न हिस्सों में बिखर गया। जिस स्थान पर माता की आँखें गिरीं उस स्थान को माता नैना देवी शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता है।

मां नैना देवी चालीसा के लाभ

मां नैना देवी चालीसा से भक्त के जीवन में कई लाभ होते है। भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण होती है, परिवार में सुख-समृद्धि आती है, अगर जीवन में कोई संकट है तोह सभी संकटों से मुक्ति मिलती है, तथा आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।

अगर आप मां नैना देवी में आस्था रखते हैं तो आपको हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में स्थित शक्तिपीठ पर जा कर मां नैना देवी का आशीर्वाद जरूर प्राप्त करना चाहिए।

Maa Naina Devi Chalisa PDF

मां नैना देवी चालीसा की PDF को आप हमारे द्वारा पा सकते है। हमने आपके लिए मां नैना देवी की चालीसा की हाई क्वालिटी PDF को तैयार किया है जिसके माध्यम से आप आसानी से प्रतिदिन नैना देवी मां की चालीसा का पाठ कर सकते है और अपने जीवन में आध्यात्मिक उन्नति पा सकते है।

नैना देवी चालीसा - Maa Naina Devi Chalisa PDF
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नैना देवी चालीसा - Maa Naina Devi Chalisa PDF

Ram Shalaka

Spiritual Knowledge & Publications

Category: Chalisa
Date: 03 Sep 2026

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नैना देवी मां दुर्गा का एक रूप मानी जाती है। माँ नैना देवी का प्रमुख मंदिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित है जो एक शक्तिपीठ हैं।

नैना देवी चालीसा (Maa Naina Devi Chalisa)


---। दोहा ।---

नैनों में बसती छवि दुर्गे नैना मात।
प्रातः काल सिमरन करू हे जग की विख्यात।।___१

सुख वैभव सब आपके चरणों का प्रताप ।
ममता अपनी दीजिए माई, मैं बालक करूं जाप।।___ २

---।। चौपाई ।।---

नमस्कार हैं नैना माता। दीन दुखी की भाग्य विधाता।।
पार्वती ने अंश दिया हैं। नैना देवी नाम किया हैं।।१।।

दबी रही थी पिंडी होकर। चरती गायें वहा खडी होकर।।
एक दिन अनसुईया गौ आई। पिया दूध और थी मुस्काई।।२।।

नैना ने देखी शुभ लीला । डर के भागा ऊँचा टीला ।।
शांत किया सपने में जाकर । मुझे पूज नैना तू आकर ।।३।।

फूल पत्र दूध से भज ले । प्रेम भावना से मुझे जप ले ।।
तेरा कुल रोशन कर दूंगी । भंडारे तेरे भर दूंगी ।।४।।

नैना ने आज्ञा को माना । शिव शक्ति का नाम बखाना ।।
ब्राह्मण संग पूजा करवाई । दिया फलित वर माँ मुस्काई।।५।।

ब्रह्मा विष्णु शंकर आये । भवन आपके पुष्प चढ़ाए ।।
पूजन आये सब नर नारी । घाटी बनी शिवालिक प्यारी ।।६।।

ज्वाला माँ से प्रेम तिहारा । जोतों से मिलता हैं सहारा ।।
पत्तो पर जोतें हैं आती । तुम्हरें भवन हैं छा जाती ।।७।।

जिनसे मिटता हैं अंधियारा । जगमग जगमग मंदिर सारा ।।
चिंतपुर्णी तुमरी बहना । सदा मानती हैं जो कहना ।।८।।

माई वैष्णो तुमको जपतीं । सदा आपके मन में बसती ।।
शुभ पर्वत को धन्य किया है । गुरु गोविंद सिंह भजन किया है ।।९।।

शक्ति की तलवार थमाई । जिसने हाहाकार मचाई ।।
मुगलो को जिसने ललकारा । गुरु के मन में रूप तिहारा ।।१०।।

अन्याय से आप लड़ाया । सबको शक्ति की दी छाया ।।
सवा लाख का हवन कराया । हलवे चने का भोग लगाया।।११।।

गुरु गोविंद सिंह करी आरती । आकाश गंगा पुण्य वारती।।
नांगल धारा दान तुम्हारा । शक्ति का स्वरुप हैं न्यारा ।।१२।।

सिंह द्वार की शोभा बढ़ाये। जो पापी को दूर भगाए ।।
चौसंठ योगिनी नाचें द्वारे। बावन भेरो हैं मतवारे ।।१३।।

रिद्धि सिद्धि चँवर डुलावे। लंगर वीर आज्ञा पावै।।
पिंडी रूप प्रसाद चढ़ावे । नैनों से शुभ दर्शन पावें।।१४।।

जैकारा जब ऊँचा लागे । भाव भक्ति का मन में जागे ।।
ढोल ढप्प बाजे शहनाई । डमरू छैने गाये बधाई।।१५।।

सावन में सखियन संग झूलों। अष्टमी को खुशियों में फूलो ।।
कन्या रूप में दर्शन देती । दान पुण्य अपनों से लेतीं।।१६।।

तन मन धन तुमको न्यौछावर । मांगू कुछ झोली फेलाकर ।।
मुझको मात विपद ने घेरा। मोहमाया ने डाला फेरा।।१७।।

काम क्रोध की ओढ़ी चादर। बैठा हूँ नैया को डूबोकर।।
अपनों ने मुख मोड़ लिया हैं। सदा अकेला छोड़ दिया हैं।।१८।।

जीवन की छूटी है नैया। तुम बिन मेरा कौन खिवैया।।
चरणामृत चरणों का पाऊँ। नैनों में तुमरे बस जाऊं।।१९।।

तुमसे ही उद्धारा होगा। जीवन में उजियारा होगा।।
कलयुग की फैली है माया। नाम तिहारा मन में ध्याया।।२०।।
Website: ramshalaka.in Spiritual PDF Document

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