श्री प्रेतराज सरकार जी की आरती Lyrics
Aarti

श्री प्रेतराज सरकार जी की आरती Lyrics

Aarti · · 1 Views

श्री प्रेतराज सरकार जी की आरती Lyrics को पढ़ना या सुनना हर उस भक्त के लिए एक स्ट्रॉन्ग एक्सपीरियंस है, जिसने कभी न कभी मेहंदीपुर धाम की शक्ति पर अटूट विश्वास किया है। कहते हैं जहाँ प्रेतराज सरकार की ज्योत जलती है, वहाँ कोई भी नेगेटिव एनर्जी या डर टिक ही नहीं सकता, बस एक पल में सब कुछ शांत हो जाता है। अगर आपका दिन भी काफी हैवी या स्ट्रेसफुल बीता है, तो दो मिनट निकालिए और इस दिव्य आरती के साथ कनेक्ट हो जाइए; दिल को जो हिम्मत और सुकून मिलेगा, वो वाकई कमाल का होगा।

श्री प्रेतराज सरकार जी की आरती Lyrics

जय प्रेतराज कृपालु मेरी, अरज अब सुन लीजिये। मैं शरण तुम्हारी आ गया, हे नाथ दर्शन दीजिये॥

मैं करूँ विनती आपसे अब, तुम दयामय चित्त धरो। चरणों का ले लिया आसरा, प्रभु वेग से मेरा दुःख हरो॥

सिर पर मोरमुकुट, कर में धनुष, गल बीच मोतियन माल है। जो करे दर्शन प्रेम से सब, कटत तन के जाल है॥

जब पहन बख्तर ले खड़ग, बाँई बगल में ढाल है। ऐसा भयंकर रूप जिनका, देख डरपत काल है॥

अति प्रबल सेना विकट योद्धा, संग में विकराल है। सब भूत प्रेत पिशाच बाँधे, कैद करते हाल है॥

तब रूप धरते वीर का, करते तैयारी चलन की। संग में लड़ाके जवान जिनकी, थाह नहीं है बलन की॥

तुम सब तरह सामर्थ हो, प्रभु सकल सुख के धाम हो। दुष्टों के मारनहार हो, भक्तों के पूरण काम हो॥

मैं हूँ मति का मंद, मेरी बुद्धि को निर्मल करो। अज्ञान का अंधेर उर में, ज्ञान का दीपक धरो॥

सब मनोरथ सिद्ध करते, जो कोई सेवा करे। तंदुल, बूरा, घृत, मेवा, भेंट ले आगे धरे॥

सुयश सुनकर आपका, दुखिया तो आये दूर के। सब स्त्री अरु पुरुष आकर, पड़े हैं चरण हुजूर के॥

लीला है अद्भुत आपकी, महिमा तो अपरंपार है। मैं ध्यान जिस दम धरत हूँ, रच देना मंगलाचार है॥

सेवक गणेशपुरी महंत जी, की लाज तुम्हारे हाथ है। करना खता सब माफ़, उनकी देना हरदम साथ है॥

दरबार में आओ अभी, सरकार में हाजिर खड़ा। इंसाफ मेरा अब करो, चरणों में आकर गिर पड़ा॥

अर्जी बहुत मैं दे चुका, अब गौर इस पर कीजिये। तत्काल इस पर हुक्म लिख दो, फैसला कर दीजिये॥

महाराज की यह स्तुति, कोई नेम से गाया करे। सब सिद्ध कारज होय उनके, रोग पीड़ा सब हरे॥

“सुखराम” सेवक आपका, उसको नहीं बिसराइये। जय-जय मनाऊँ आपकी, बेड़े को पार लगाइये॥

श्री प्रेतराज सरकार जी की आरती के प्रमुख फायदे (Benefits)

  • नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नज़र से सुरक्षा: घर या मन में किसी भी प्रकार का भारीपन, डर या बुरी नज़र का प्रभाव हो, तो इस आरती के नियमित पाठ से एक सुरक्षा चक्र (protective shield) बन जाता है और सारी नेगेटिविटी दूर होती है।

  • अज्ञात भय और एंग्जायटी से मुक्ति: कई बार बिना किसी वजह के बेचैनी, रात को अचानक डर लगना या बुरे सपने आने की समस्या होती है। प्रेतराज सरकार का ध्यान और आरती करने से मन को गजब का आत्मविश्वास और मानसिक शांति मिलती है।

  • संकटों और बाधाओं का नाश: लाइफ में अगर लंबे समय से काम अटक रहे हों या अचानक से मुसीबतें आ रही हों, तो माना जाता है कि सरकार की कृपा से जीवन की बड़ी से बड़ी रुकावटें कट जाती हैं।

  • घर में पॉजिटिव वाइब्स का संचार: शाम के समय कपूर जलाकर यह आरती करने से पूरे घर का माहौल शुद्ध और ऊर्जावान हो जाता है, जिससे कलह-क्लेश खत्म होकर पॉजिटिव माहौल बनता है।

  • कठिन समय में आंतरिक शक्ति: जब इंसान चारों तरफ से खुद को बेबस महसूस करता है, तब यह आरती एक मजबूत इमोशनल सपोर्ट देती है—यह भरोसा दिलाती है कि कोई दिव्य शक्ति आपके साथ खड़ी है।

श्री प्रेतराज सरकार जी की आरती Lyrics
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श्री प्रेतराज सरकार जी की आरती Lyrics

Ram Shalaka

Spiritual Knowledge & Publications

Category: Aarti
Date: 13 Oct 2026

श्री प्रेतराज सरकार जी की आरती Lyrics

जय प्रेतराज कृपालु मेरी, अरज अब सुन लीजिये। मैं शरण तुम्हारी आ गया, हे नाथ दर्शन दीजिये॥

मैं करूँ विनती आपसे अब, तुम दयामय चित्त धरो। चरणों का ले लिया आसरा, प्रभु वेग से मेरा दुःख हरो॥

सिर पर मोरमुकुट, कर में धनुष, गल बीच मोतियन माल है। जो करे दर्शन प्रेम से सब, कटत तन के जाल है॥

जब पहन बख्तर ले खड़ग, बाँई बगल में ढाल है। ऐसा भयंकर रूप जिनका, देख डरपत काल है॥

अति प्रबल सेना विकट योद्धा, संग में विकराल है। सब भूत प्रेत पिशाच बाँधे, कैद करते हाल है॥

तब रूप धरते वीर का, करते तैयारी चलन की। संग में लड़ाके जवान जिनकी, थाह नहीं है बलन की॥

तुम सब तरह सामर्थ हो, प्रभु सकल सुख के धाम हो। दुष्टों के मारनहार हो, भक्तों के पूरण काम हो॥

मैं हूँ मति का मंद, मेरी बुद्धि को निर्मल करो। अज्ञान का अंधेर उर में, ज्ञान का दीपक धरो॥

सब मनोरथ सिद्ध करते, जो कोई सेवा करे। तंदुल, बूरा, घृत, मेवा, भेंट ले आगे धरे॥

सुयश सुनकर आपका, दुखिया तो आये दूर के। सब स्त्री अरु पुरुष आकर, पड़े हैं चरण हुजूर के॥

लीला है अद्भुत आपकी, महिमा तो अपरंपार है। मैं ध्यान जिस दम धरत हूँ, रच देना मंगलाचार है॥

सेवक गणेशपुरी महंत जी, की लाज तुम्हारे हाथ है। करना खता सब माफ़, उनकी देना हरदम साथ है॥

दरबार में आओ अभी, सरकार में हाजिर खड़ा। इंसाफ मेरा अब करो, चरणों में आकर गिर पड़ा॥

अर्जी बहुत मैं दे चुका, अब गौर इस पर कीजिये। तत्काल इस पर हुक्म लिख दो, फैसला कर दीजिये॥

महाराज की यह स्तुति, कोई नेम से गाया करे। सब सिद्ध कारज होय उनके, रोग पीड़ा सब हरे॥

“सुखराम” सेवक आपका, उसको नहीं बिसराइये। जय-जय मनाऊँ आपकी, बेड़े को पार लगाइये॥

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