मंगल आरती | Mangal Aarti Lyrics in Hindi
सुबह-सुबह जब घर के शांत माहौल में Mangal Aarti के पावन स्वर गूंजते हैं, तो दिल के हर कोने में एक अजीब सा सुकून और नई उम्मीद भर जाती है। शास्त्रों में माना गया है कि दिन की पहली आरती प्रभु को प्रेम से जगाने के साथ-साथ हमारे अपने भीतर की सोई हुई चेतना को भी जगा देती है। जब आप पूरे भाव से इस आरती को गुनगुनाते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे लाइफ की हर टेंशन अब भगवान के हाथों में सेफ है। अगर आपका मन भी अक्सर स्ट्रेस या भारीपन से घिरा रहता है, तो यह आरती आपके घर में एक सात्विक शांति ले आएगी।
श्री मंगल आरती लिरिक्स
जय जय मंगल रूप दयाला, मंगल आरती कीजै।
कष्ट हरण सुख शांति करन, चरनन चित्त दीजै ॥
जय जय मंगल रूप दयाला...
भोर भई प्रभु जागे सुंदर, नैन कमल मुस्काए।
सुर-मुनि गंधर्व द्वार खड़े सब, पावन गुण यश गाए ॥
धूप-दीप कपूर ज्योति से, जगमग मंदिर सोहै।
निरखि छवि मन मुदित होत है, त्रिभुवन का मन मोहै ॥
जय जय मंगल रूप दयाला...
शंख-मृदंग और झांझ-घंटी की, मधुर गूंज जब बाजे।
कंचन थार सजी आरती, भक्तन हिय रस साजे ॥
भव-भय भंजन संशय नाशन, कृपा दृष्टि अब कीजै।
शरण गहे की लाज राखि प्रभु, अभय दान शुभ दीजै ॥
जय जय मंगल रूप दयाला...
जो जन प्रेम सहित निसि-वासर, मंगल आरती गावे।
रिद्धि-सिद्धि सुख-संपति पावे, मनवांछित फल पावे ॥
जय जय मंगल रूप दयाला, मंगल आरती कीजै।
कष्ट हरण सुख शांति करन, चरनन चित्त दीजै ॥
आरती का सरल भावार्थ
मुखड़ा: हे मंगलकारी प्रभु! आपकी यह प्रथम मंगल आरती संपूर्ण दुखों का नाश करने वाली और सुख-शांति देने वाली है। हमारा मन सदा आपके चरणों में लगा रहे।
प्रथम अंतरा: सुबह होते ही प्रभु के कमल समान नेत्र खिल उठते हैं। द्वार पर सभी देव और साधु-संत उनका यशोगान कर रहे हैं। कपूर और दीप की पावन ज्योति से संपूर्ण मंदिर जगमगा रहा है।
द्वितीय अंतरा: शंख, घंटी और मृदंग की दिव्य ध्वनि के साथ कंचन (सोने) की थाल से प्रभु की मंगल आरती उतारी जा रही है। हे प्रभु! अपनी कृपा से हमारे सभी डर और संशय दूर कर हमें निर्भयता का वरदान दीजिए।
तृतीय अंतरा: जो भी भक्त प्रातःकाल सच्चे मन और प्रेम से यह आरती गाता है, उसके जीवन की बाधाएं दूर होकर सुख, समृद्धि और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।
मंगल आरती के प्रमुख फायदे (Benefits)
दिनभर के लिए पॉजिटिव माइंडसेट: सुबह के समय मंगल आरती करने से दिमाग शांत होता है और दिनभर काम के तनाव या एंग्जायटी से निपटने के लिए आंतरिक ऊर्जा और फोकस मिलता है।
घर से नकारात्मक ऊर्जा का निष्कासन: प्रातःकाल कपूर या शुद्ध घी के दीपक से मंगल आरती करने पर घर का वातावरण सात्विक बनता है और रातभर का भारीपन या नेगेटिव वाइब्स दूर होती हैं।
कार्यों में शुभता और विघ्नों का नाश: मंगल आरती का सीधा संबंध 'कल्याण' से है; मान्यता है कि दिन की पहली शुरुआत प्रभु की इस स्तुति से करने पर बनते हुए कामों की रुकावटें दूर होती हैं।
आलस्य और मानसिक सुस्ती से मुक्ति: आरती के बोल, शंख की ध्वनि और घंटियों का नाद शरीर और मन में नई ताजगी भर देता है, जिससे सुस्ती दूर होकर सक्रियता आती है।
पारिवारिक शांति और सद्भाव: जब परिवार के सदस्य सुबह मिलकर मंगल आरती करते हैं, तो आपसी कलह शांत होती है और घर में सुख, शांति व स्नेह का वास होता है।
मंगल आरती | Mangal Aarti Lyrics in Hindi
Ram Shalaka
Spiritual Knowledge & Publications
मंगल आरती | Mangal Aarti Lyrics in Hindi
सुबह-सुबह जब घर के शांत माहौल में Mangal Aarti के पावन स्वर गूंजते हैं, तो दिल के हर कोने में एक अजीब सा सुकून और नई उम्मीद भर जाती है। शास्त्रों में माना गया है कि दिन की पहली आरती प्रभु को प्रेम से जगाने के साथ-साथ हमारे अपने भीतर की सोई हुई चेतना को भी जगा देती है। जब आप पूरे भाव से इस आरती को गुनगुनाते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे लाइफ की हर टेंशन अब भगवान के हाथों में सेफ है। अगर आपका मन भी अक्सर स्ट्रेस या भारीपन से घिरा रहता है, तो यह आरती आपके घर में एक सात्विक शांति ले आएगी।
श्री मंगल आरती लिरिक्स
जय जय मंगल रूप दयाला, मंगल आरती कीजै।
कष्ट हरण सुख शांति करन, चरनन चित्त दीजै ॥
जय जय मंगल रूप दयाला...
भोर भई प्रभु जागे सुंदर, नैन कमल मुस्काए।
सुर-मुनि गंधर्व द्वार खड़े सब, पावन गुण यश गाए ॥
धूप-दीप कपूर ज्योति से, जगमग मंदिर सोहै।
निरखि छवि मन मुदित होत है, त्रिभुवन का मन मोहै ॥
जय जय मंगल रूप दयाला...
शंख-मृदंग और झांझ-घंटी की, मधुर गूंज जब बाजे।
कंचन थार सजी आरती, भक्तन हिय रस साजे ॥
भव-भय भंजन संशय नाशन, कृपा दृष्टि अब कीजै।
शरण गहे की लाज राखि प्रभु, अभय दान शुभ दीजै ॥
जय जय मंगल रूप दयाला...
जो जन प्रेम सहित निसि-वासर, मंगल आरती गावे।
रिद्धि-सिद्धि सुख-संपति पावे, मनवांछित फल पावे ॥
जय जय मंगल रूप दयाला, मंगल आरती कीजै।
कष्ट हरण सुख शांति करन, चरनन चित्त दीजै ॥
आरती का सरल भावार्थ
मुखड़ा: हे मंगलकारी प्रभु! आपकी यह प्रथम मंगल आरती संपूर्ण दुखों का नाश करने वाली और सुख-शांति देने वाली है। हमारा मन सदा आपके चरणों में लगा रहे।
प्रथम अंतरा: सुबह होते ही प्रभु के कमल समान नेत्र खिल उठते हैं। द्वार पर सभी देव और साधु-संत उनका यशोगान कर रहे हैं। कपूर और दीप की पावन ज्योति से संपूर्ण मंदिर जगमगा रहा है।
द्वितीय अंतरा: शंख, घंटी और मृदंग की दिव्य ध्वनि के साथ कंचन (सोने) की थाल से प्रभु की मंगल आरती उतारी जा रही है। हे प्रभु! अपनी कृपा से हमारे सभी डर और संशय दूर कर हमें निर्भयता का वरदान दीजिए।
तृतीय अंतरा: जो भी भक्त प्रातःकाल सच्चे मन और प्रेम से यह आरती गाता है, उसके जीवन की बाधाएं दूर होकर सुख, समृद्धि और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।
मंगल आरती के प्रमुख फायदे (Benefits)
दिनभर के लिए पॉजिटिव माइंडसेट: सुबह के समय मंगल आरती करने से दिमाग शांत होता है और दिनभर काम के तनाव या एंग्जायटी से निपटने के लिए आंतरिक ऊर्जा और फोकस मिलता है।
घर से नकारात्मक ऊर्जा का निष्कासन: प्रातःकाल कपूर या शुद्ध घी के दीपक से मंगल आरती करने पर घर का वातावरण सात्विक बनता है और रातभर का भारीपन या नेगेटिव वाइब्स दूर होती हैं।
कार्यों में शुभता और विघ्नों का नाश: मंगल आरती का सीधा संबंध 'कल्याण' से है; मान्यता है कि दिन की पहली शुरुआत प्रभु की इस स्तुति से करने पर बनते हुए कामों की रुकावटें दूर होती हैं।
आलस्य और मानसिक सुस्ती से मुक्ति: आरती के बोल, शंख की ध्वनि और घंटियों का नाद शरीर और मन में नई ताजगी भर देता है, जिससे सुस्ती दूर होकर सक्रियता आती है।
पारिवारिक शांति और सद्भाव: जब परिवार के सदस्य सुबह मिलकर मंगल आरती करते हैं, तो आपसी कलह शांत होती है और घर में सुख, शांति व स्नेह का वास होता है।
AI आध्यात्मिक गुरु
क्या मन में कोई सवाल है? हमारे AI गुरु से बात करें — बिल्कुल मुफ्त!