चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान की आरती लिरिक्स
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चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान की आरती लिरिक्स

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चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान की आरती जब भी मन के किसी कोने में गूंजती है ना, तो अंदर की सारी बेचैनी और भागदौड़ पलभर में शांत हो जाती है। 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का नाम ही 'चिंतामणि' इसलिए है, क्योंकि वो अपने हर भक्त की चिंता को दूर करके आत्मा को एक गहरा सुकून देते हैं। लाइफ में जब ओवरथिंकिंग और स्ट्रेस हद से ज्यादा बढ़ जाए, तब दीपक जलाकर प्रभु के चरणों में यह आरती गाना दिल को अंदर से हील कर देता है। चलिए, आज कुछ देर दुनिया की सारी टेंशन को साइड में रखकर भगवान पार्श्वनाथ की इस दिव्य आरती की शांत वाइब्स में खुद को खो देते हैं।

चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान की आरती

ओम जय पारस देवा, स्वामी जय पारस देवा।

सुर-नर-मुनिजन तुम चरणन की, करते नित सेवा॥

पौष वदी ग्यारस काशी में, आनंद अतिभारी।
अश्वसेन वामा माता उर, लीनों अवतारी॥
ओम जय पारस देवा...

श्यामवरण नवहस्त काय, पग उरग लखन सोहैं।
सुरकृत अति अनुपम प्रभु भूषण, सबका मन मोहैं॥
ओम जय पारस देवा...

जलते देख नाग-नागिन को, मंत्र नवकार दिया।
हरा कमठ का मान, ज्ञान का भानु प्रकाश किया॥
ओम जय पारस देवा...

मात-पिता तुम स्वामी मेरे, आस करूँ किसकी।
तुम बिन दाता और न कोई, शरण गहूँ जिसकी॥
ओम जय पारस देवा...

तुम परमात्म, तुम अध्यात्म, तुम अंतर्यामी।
स्वर्ग-मोक्ष के दाता तुम हो, त्रिभुवन के स्वामी॥
ओम जय पारस देवा...

दीनबंधु दुःखहरण जिनेश्वर, तुम ही हो मेरे।
दो शिवधाम को वास, दास हम द्वार खड़े तेरे॥
ओम जय पारस देवा...

विपद-विकार मिटाओ मन का, अर्ज सुनो दाता।
सेवक दोउ कर जोड़ प्रभु के, चरणों चित लाता॥
ओम जय पारस देवा...

चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान की आरती के फायदे (Benefits)

  • चिंताओं और ओवरथिंकिंग से राहत: जैसा कि नाम ही 'चिंतामणि' है—इनकी आरती का नियमित पाठ मन के गैर-ज़रूरी डर, तनाव और ओवरथिंकिंग को शांत करके मानसिक सुकून देता है।

  • सकारात्मक और शांत ऊर्जा का संचार: प्रभु पार्श्वनाथ की प्रतिमा परम शांत मुद्रा में होती है। उनकी आरती गाने या सुनने से घर में सात्विक, पवित्र और स्ट्रेस-फ्री माहौल बनता है।

  • संकटों और विघ्नों का शमन: जैन परंपरा में भगवान पार्श्वनाथ को विघ्नहर्ता माना जाता है। सच्चे भाव से उनकी स्तुति करने से जीवन में आ रही अनचाही रुकावटें दूर होती हैं।

  • एकाग्रता और आत्मिक शुद्धि: आरती के शब्द आत्मा को कर्मों के भारीपन से मुक्त करने की प्रेरणा देते हैं, जिससे ध्यान, फोकस और आत्मिक शांति में बढ़ोतरी होती है।

  • कठिन समय में धैर्य और संबल: जब परिस्थितियाँ विपरीत हों, तब प्रभु की भक्ति इंसान को विचलित हुए बिना सही निर्णय लेने का आंतरिक धैर्य और संतुलन देती है।

चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान की आरती लिरिक्स
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चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान की आरती लिरिक्स

Ram Shalaka

Spiritual Knowledge & Publications

Category: Aarti
Date: 13 Oct 2026

चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान की आरती लिरिक्स

चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान की आरती

ओम जय पारस देवा, स्वामी जय पारस देवा।

सुर-नर-मुनिजन तुम चरणन की, करते नित सेवा॥

पौष वदी ग्यारस काशी में, आनंद अतिभारी।
अश्वसेन वामा माता उर, लीनों अवतारी॥
ओम जय पारस देवा...

श्यामवरण नवहस्त काय, पग उरग लखन सोहैं।
सुरकृत अति अनुपम प्रभु भूषण, सबका मन मोहैं॥
ओम जय पारस देवा...

जलते देख नाग-नागिन को, मंत्र नवकार दिया।
हरा कमठ का मान, ज्ञान का भानु प्रकाश किया॥
ओम जय पारस देवा...

मात-पिता तुम स्वामी मेरे, आस करूँ किसकी।
तुम बिन दाता और न कोई, शरण गहूँ जिसकी॥
ओम जय पारस देवा...

तुम परमात्म, तुम अध्यात्म, तुम अंतर्यामी।
स्वर्ग-मोक्ष के दाता तुम हो, त्रिभुवन के स्वामी॥
ओम जय पारस देवा...

दीनबंधु दुःखहरण जिनेश्वर, तुम ही हो मेरे।
दो शिवधाम को वास, दास हम द्वार खड़े तेरे॥
ओम जय पारस देवा...

विपद-विकार मिटाओ मन का, अर्ज सुनो दाता।
सेवक दोउ कर जोड़ प्रभु के, चरणों चित लाता॥
ओम जय पारस देवा...

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