Shani Chalisa - शनि चालीसा PDF हिंदी में
ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को कर्मफल दाता और न्याय का देवता माना गया है, यानी वे किसी के साथ अन्याय नहीं करते बल्कि हमारे कर्मों के अनुसार ही फल देते हैं। जब कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा चलती है, तो जीवन में अचानक रुकावटें, मानसिक तनाव और आर्थिक उतार-चढ़ाव आने लगते हैं। ऐसे कठिन समय में शनि देव के प्रकोप को शांत करने और उनकी कृपा पाने का सबसे सरल और अचूक उपाय है श्री शनि चालीसा का नियमित पाठ। लेकिन रोजमर्रा के व्यस्त रूटीन में हर वक्त पूजा की किताब साथ रखना मुमकिन नहीं होता, और ऑनलाइन पढ़ते समय गलत वर्तनी व लगातार विज्ञापनों का आना पाठ के ध्यान को भंग कर देता है।
आपकी इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए हमने तैयार की है यह श्री शनि चालीसा फ्री हिंदी PDF, जिसे आप आसानी से एक क्लिक में डाउनलोड करके अपने फोन या टैबलेट में सुरक्षित रख सकते हैं। बड़े और सुस्पष्ट अक्षरों में तैयार की गई इस PDF को आप शनिवार के दिन, मंदिर में या यात्रा के दौरान बिना किसी इंटरनेट कनेक्शन के भी शांति से पढ़ सकते हैं। नीचे दिए गए डायरेक्ट लिंक से PDF डाउनलोड करें और श्रद्धापूर्वक पाठ कर अपने जीवन की बाधाओं को दूर करें।
श्री शनि चालीसा Lyrics
दोहा:
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
चौपाई:
जय जय श्री शनिदेव, दयाला।
करहु कृपा रघुनाथ के नाला॥
हाट, बाजार, ग्राम को राजा।
यहि विधि कष्ट भंजन महाराजा॥
धूप, दीप, नैवेद्य चढ़ावत।
सिन्दूर चढ़ाकर मस्तक नवावत॥
तुम बिन कृपा दीन पर नाहीं।
करहु कृपा जय जय उर लाहीं॥
कृपा करहु शनि देव अनाथा।
रखु शरण अब लो हमके राखा॥
हे कश्यप नंदन सब दुःख हरनी।
ज्ञान विवेक बुद्धि बलदानी॥
जयति जय जय श्री शनिदेव।
अरुण चर्मा करम निसाचर॥
कृपा कटाक्ष हम पर रखो।
सब अनिष्ट दूर अब करो॥
Shani Chalisa - शनि चालीसा PDF हिंदी में
Ram Shalaka
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Shani Chalisa - शनि चालीसा PDF हिंदी में
ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को कर्मफल दाता और न्याय का देवता माना गया है, यानी वे किसी के साथ अन्याय नहीं करते बल्कि हमारे कर्मों के अनुसार ही फल देते हैं। जब कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा चलती है, तो जीवन में अचानक रुकावटें, मानसिक तनाव और आर्थिक उतार-चढ़ाव आने लगते हैं। ऐसे कठिन समय में शनि देव के प्रकोप को शांत करने और उनकी कृपा पाने का सबसे सरल और अचूक उपाय है श्री शनि चालीसा का नियमित पाठ। लेकिन रोजमर्रा के व्यस्त रूटीन में हर वक्त पूजा की किताब साथ रखना मुमकिन नहीं होता, और ऑनलाइन पढ़ते समय गलत वर्तनी व लगातार विज्ञापनों का आना पाठ के ध्यान को भंग कर देता है।
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श्री शनि चालीसा Lyrics
दोहा:
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
चौपाई:
जय जय श्री शनिदेव, दयाला।
करहु कृपा रघुनाथ के नाला॥
हाट, बाजार, ग्राम को राजा।
यहि विधि कष्ट भंजन महाराजा॥
धूप, दीप, नैवेद्य चढ़ावत।
सिन्दूर चढ़ाकर मस्तक नवावत॥
तुम बिन कृपा दीन पर नाहीं।
करहु कृपा जय जय उर लाहीं॥
कृपा करहु शनि देव अनाथा।
रखु शरण अब लो हमके राखा॥
हे कश्यप नंदन सब दुःख हरनी।
ज्ञान विवेक बुद्धि बलदानी॥
जयति जय जय श्री शनिदेव।
अरुण चर्मा करम निसाचर॥
कृपा कटाक्ष हम पर रखो।
सब अनिष्ट दूर अब करो॥
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