श्री जगन्नाथ चालीसा | Shri Jagannath Chalisa
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श्री जगन्नाथ चालीसा | Shri Jagannath Chalisa

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श्री जगन्नाथ चालीसा पढ़ें और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व माता सुभद्रा का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें। यहां पढ़ें संपूर्ण जगन्नाथ चालीसा।…

# ॥ श्री जगन्नाथ चालीसा ॥


भगवान श्री जगन्नाथ को भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है और ओडिशा के पुरी में स्थित उनका धाम श्रद्धालुओं के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। श्री जगन्नाथ चालीसा का पाठ भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा का स्मरण करते हुए करते हैं। अगर आप भगवान श्री नरसिंह की चालीसा पढ़ना चाहते हैं, तो भगवान श्री नरसिंह चालीसा पर क्लिक करें।

## ॥ दोहा ॥

जय जगन्नाथ स्वामी, जय बलभद्र संभाव।
जय सुभद्रा ताई, आज्ञा करैं सब काज॥

## ॥ चालीसा ॥

जय जगन्नाथ दयालु, दया निधान।
करुणा रस सिंधु, नयन अंधकार॥

कटकट धनुष विराजत, शंखाधार।
मुख में कमल, नैनन में चकार॥

कनकमय शीश नव, चारु चंद्र भाला।
नख शिख छवि गंजित, सोहे बाला॥

अरुणांचल मुकुट, श्रिया सोहत रूप।
मुख में मुरली, बनमाल अजरे॥

शंख बाजे, मृदंग बाजत ताल।
वज्रांकुश गदा, शुभ बदन काल॥

रक्त अंग वस्त्र, विभूषण बाजत।
प्रतीत शोभित, नील विशाल जाजत॥

आवत धावत तब, जू तार गृहवत।
कारज सर्व करैं, सुधीर बुधवत॥

शची जब भय भए, सागर पार।
रामदास कहैं, वेद बिख्यात॥

श्री जगन्नाथ चालीसा जो कोई।
गावैं पाठ करैं, कलेश नखटाई॥

जो यह पाठ करे मन लाई।
तेस ही कृपा करहु जगदीश॥

## ॥ दोहा ॥

पवन तनय संकट हरण गोसाई।
कृपा दृष्टि तुम्हारी, करहु विलासा॥

॥ इति श्री जगन्नाथ चालीसा संपूर्ण ॥

श्री जगन्नाथ चालीसा PDF

श्री जगन्नाथ चालीसा का PDF आप पूजा-पाठ और नियमित पाठ के लिए अपने मोबाइल या कंप्यूटर में रख सकते हैं। नीचे दिए गए Download Button पर क्लिक करके श्री जगन्नाथ चालीसा PDF आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं।


श्री जगन्नाथ चालीसा | Shri Jagannath Chalisa
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श्री जगन्नाथ चालीसा | Shri Jagannath Chalisa

Ram Shalaka

Spiritual Knowledge & Publications

Category: Chalisa
Date: 05 Sep 2026

श्री जगन्नाथ चालीसा | Shri Jagannath Chalisa

श्री जगन्नाथ चालीसा पढ़ें और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व माता सुभद्रा का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें। यहां पढ़ें संपूर्ण जगन्नाथ चालीसा।
# ॥ श्री जगन्नाथ चालीसा ॥

भगवान श्री जगन्नाथ को भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है और ओडिशा के पुरी में स्थित उनका धाम श्रद्धालुओं के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। श्री जगन्नाथ चालीसा का पाठ भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा का स्मरण करते हुए करते हैं।

## ॥ दोहा ॥

जय जगन्नाथ स्वामी, जय बलभद्र संभाव।
जय सुभद्रा ताई, आज्ञा करैं सब काज॥

## ॥ चालीसा ॥

जय जगन्नाथ दयालु, दया निधान।
करुणा रस सिंधु, नयन अंधकार॥

कटकट धनुष विराजत, शंखाधार।
मुख में कमल, नैनन में चकार॥

कनकमय शीश नव, चारु चंद्र भाला।
नख शिख छवि गंजित, सोहे बाला॥

अरुणांचल मुकुट, श्रिया सोहत रूप।
मुख में मुरली, बनमाल अजरे॥

शंख बाजे, मृदंग बाजत ताल।
वज्रांकुश गदा, शुभ बदन काल॥

रक्त अंग वस्त्र, विभूषण बाजत।
प्रतीत शोभित, नील विशाल जाजत॥

आवत धावत तब, जू तार गृहवत।
कारज सर्व करैं, सुधीर बुधवत॥

शची जब भय भए, सागर पार।
रामदास कहैं, वेद बिख्यात॥

श्री जगन्नाथ चालीसा जो कोई।
गावैं पाठ करैं, कलेश नखटाई॥

जो यह पाठ करे मन लाई।
तेस ही कृपा करहु जगदीश॥

## ॥ दोहा ॥

पवन तनय संकट हरण गोसाई।
कृपा दृष्टि तुम्हारी, करहु विलासा॥

॥ इति श्री जगन्नाथ चालीसा संपूर्ण ॥

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