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महाकाल स्तुति - Mahakal Stuti PDF

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महाकाल भगवान शिव के एक विशेष स्वरूप है जिसे क्रूर और भयानक रूप में जाता है। उन्हें काल का देवता भी कहा जाता है। उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में उनकी विशेष रूप से पूजा की जाती है।

महाकाल स्तुति शिव जी के महाकाल रूप की वंदना और स्तुति के लिए पाठ की जाती है। इसे भक्त शिव जी के निर्गुण और निराकार रूप में उनकी महिमा और शक्ति का स्मरण करने के लिए गाते हैं। यह स्तुति शिव जी की असीम शक्ति, काल पर विजय, और मोक्ष प्रदान करने की क्षमता का गुण गान करती है।

महाकाल स्तुति (Mahakal Stuti)

|| ब्रह्मोवाच ||

नमोऽस्त्वनन्तरूपाय नीलकण्ठ नमोऽस्तु ते ।
अविज्ञातस्वरूपाय कैवल्यायामृताय च ॥-१

नान्तं देवा विजानन्ति यस्य तस्मै नमो नमः।
यं न वाचः प्रशंसन्ति नमस्तस्मै चिदात्मने ॥-२

योगिनो यं हृदःकोशे प्रणिधानेन निश्चलाः ।
ज्योतीरूपं प्रपश्यन्ति तस्मै श्रीब्रह्मणे नमः ॥-३

कालात्पराय कालाय स्वेच्छया पुरुषाय च ।
गुणत्रयस्वरूपाय नमः प्रकृतिरूपिणे ॥-४

विष्णवे सत्त्वरूपाय रजोरूपाय वेधसे ।
तमोरूपाय रुद्राय स्थितिसर्गान्तकारिणे ॥-५

नमो नमः स्वरूपाय पञ्चबुद्धीन्द्रियात्मने ।
क्षित्यादिपञ्चरूपाय नमस्ते विषयात्मने ॥-६

नमो ब्रह्माण्डरूपाय तदन्तर्वर्तिने नमः ।
अर्वाचीनपराचीनविश्वरूपाय ते नमः ।।-७

अचिन्त्यनित्यरूपाय सदसत्पतये नमः ।
नमस्ते भक्तकृपया स्वेच्छाविष्कृतविग्रह ॥-८

तव निःश्वसितं वेदास्तव वेदोऽखिलं जगत् ।
विश्वभूतानि ते पादः शिरो द्यौः समवर्तत ॥-९

नाभ्या आसीदन्तरिक्षं लोमानि च वनस्पतिः ।
चन्द्रमा मनसो जातश्चक्षोः सूर्यस्तव प्रभो ।।-१०

त्वमेव सर्वं त्वयि देवि सर्वं
सर्वस्तुतिस्तव्य इह त्वमेव ॥-११

ईश त्वया वास्यमिदं हि सर्वं
नमोस्तु भूयोऽपि नमो नमस्ते ॥-१२

अन्य प्रमुख स्तुति - शनिदेव स्तुति, मां गौरी स्तुति, श्री विष्णु स्तुति, श्री राम स्तुति और दामोदर स्तुति

महाकाल स्तुति के महत्व

भगवान शिव के कई प्रमुख स्वरूप है जिसमें से एक महाकाल है।महाकाल स्तुति के श्लोकों में शिव को समस्त ब्रह्मांड का स्वामी, कालों का भी काल यानी की महाकाल कहा गया है। इसमें शिव का स्वरूप निर्गुण, निर्विकल्प, और निर्विकार है जो समय और स्थान से परे है।

महाकाल स्तुति का सच्चे मन से नियमित रूप से पाठ करने से भक्त के सभी सभी भयों और दुखों का नाश हो जाता है। मन शांत होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। महाकाल की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। और ऐसा भी माना जाता हे की इस स्तुति में भक्त को मोक्ष प्राप्त करवाने की भी शक्ति है।

Mahakal Stuti PDF

अगर आप महाकाल स्तुति की PDF ढूंढ रहे हो तो हमने आपके लिए एक बेहतरीन हाई क्वालिटी PDF को तैयार किया है। आप इस PDF को हमारे द्वारा पा सकते है और प्रतिदिन महाकाल स्तुति का पाठ करके जीवन की सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर सकते है।

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महाकाल स्तुति - Mahakal Stuti PDF

Ram Shalaka

Spiritual Knowledge & Publications

Category: Stuti
Date: 11 Nov 2024

महाकाल स्तुति - Mahakal Stuti PDF

महाकाल भगवान शिव के एक विशेष स्वरूप है जिसे क्रूर और भयानक रूप में जाता है। उन्हें काल का देवता भी कहा जाता है। उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में उनकी विशेष रूप से पूजा की जाती है।

महाकाल स्तुति शिव जी के महाकाल रूप की वंदना और स्तुति के लिए पाठ की जाती है। इसे भक्त शिव जी के निर्गुण और निराकार रूप में उनकी महिमा और शक्ति का स्मरण करने के लिए गाते हैं। यह स्तुति शिव जी की असीम शक्ति, काल पर विजय, और मोक्ष प्रदान करने की क्षमता का गुण गान करती है।

महाकाल स्तुति (Mahakal Stuti)

|| ब्रह्मोवाच ||

नमोऽस्त्वनन्तरूपाय नीलकण्ठ नमोऽस्तु ते ।
अविज्ञातस्वरूपाय कैवल्यायामृताय च ॥-१

नान्तं देवा विजानन्ति यस्य तस्मै नमो नमः।
यं न वाचः प्रशंसन्ति नमस्तस्मै चिदात्मने ॥-२

योगिनो यं हृदःकोशे प्रणिधानेन निश्चलाः ।
ज्योतीरूपं प्रपश्यन्ति तस्मै श्रीब्रह्मणे नमः ॥-३

कालात्पराय कालाय स्वेच्छया पुरुषाय च ।
गुणत्रयस्वरूपाय नमः प्रकृतिरूपिणे ॥-४

विष्णवे सत्त्वरूपाय रजोरूपाय वेधसे ।
तमोरूपाय रुद्राय स्थितिसर्गान्तकारिणे ॥-५

नमो नमः स्वरूपाय पञ्चबुद्धीन्द्रियात्मने ।
क्षित्यादिपञ्चरूपाय नमस्ते विषयात्मने ॥-६

नमो ब्रह्माण्डरूपाय तदन्तर्वर्तिने नमः ।
अर्वाचीनपराचीनविश्वरूपाय ते नमः ।।-७

अचिन्त्यनित्यरूपाय सदसत्पतये नमः ।
नमस्ते भक्तकृपया स्वेच्छाविष्कृतविग्रह ॥-८

तव निःश्वसितं वेदास्तव वेदोऽखिलं जगत् ।
विश्वभूतानि ते पादः शिरो द्यौः समवर्तत ॥-९

नाभ्या आसीदन्तरिक्षं लोमानि च वनस्पतिः ।
चन्द्रमा मनसो जातश्चक्षोः सूर्यस्तव प्रभो ।।-१०

त्वमेव सर्वं त्वयि देवि सर्वं
सर्वस्तुतिस्तव्य इह त्वमेव ॥-११

ईश त्वया वास्यमिदं हि सर्वं
नमोस्तु भूयोऽपि नमो नमस्ते ॥-१२

अन्य प्रमुख स्तुति - शनिदेव स्तुति, मां गौरी स्तुति, श्री विष्णु स्तुति, श्री राम स्तुति और दामोदर स्तुति

महाकाल स्तुति के महत्व

भगवान शिव के कई प्रमुख स्वरूप है जिसमें से एक महाकाल है।महाकाल स्तुति के श्लोकों में शिव को समस्त ब्रह्मांड का स्वामी, कालों का भी काल यानी की महाकाल कहा गया है। इसमें शिव का स्वरूप निर्गुण, निर्विकल्प, और निर्विकार है जो समय और स्थान से परे है।

महाकाल स्तुति का सच्चे मन से नियमित रूप से पाठ करने से भक्त के सभी सभी भयों और दुखों का नाश हो जाता है। मन शांत होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। महाकाल की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। और ऐसा भी माना जाता हे की इस स्तुति में भक्त को मोक्ष प्राप्त करवाने की भी शक्ति है।

Mahakal Stuti PDF

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Website: ramshalaka.in Spiritual PDF Document

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