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श्री भगवत भगवान की है आरती Lyrics | Shree bhaagwat bhagwaan ki hai aarti lyrics

Bhajan · · 632 Views

सनातन धर्म में आरती केवल एक परंपरा नहीं — यह ईश्वर के प्रति समर्पण का वह पवित्र क्षण है जब भक्त और भगवान के बीच की दूरी मिट जाती है। और जब आरती श्रीमद् भागवत जैसे अमर ग्रंथ की हो — तो उसकी महिमा और भी असीम हो जाती है।

"श्री भगवत भगवान की है आरती, पापियों को पाप से है तारती" — यह पंक्ति सुनते ही मन में एक अलग ही भाव जागता है। यह आरती उस ग्रंथ की वंदना है जिसे पञ्चम वेद कहा गया है — जो न केवल ज्ञान का भंडार है, बल्कि हर पापी को पाप से मुक्त करने की, हर भटके को सन्मार्ग दिखाने की और हर टूटे हुए जीवन को संवारने की अद्भुत शक्ति रखता है।

श्रीमद् भागवत — जिसमें श्री हरि का नाम भी है, धाम भी है — वह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, वह जग के मंगल की आरती है। इसके मधुर बोल संसार के बंधनों को खोलते हैं, श्री मधुसूदन के दर्शन कराते हैं और जीवन में सुख लाते हैं, दुख हरते हैं।

चाहे आप श्री राम के भक्त हों या घनश्याम के दीवाने — यह आरती हर रूप में प्रभु की महिमा का गुणगान करती है और हर हृदय को पावन करती है।

आइए, इस पावन पुनीत शान्ति गीत के हर शब्द में उतरें और श्री भागवत भगवान की इस दिव्य आरती की महिमा को आत्मसात करें — 🙏

श्री भगवत भगवान की है आरती Lyrics | Shree bhaagwat bhagwaan ki hai aarti lyrics

श्री भगवत भगवान की है आरती
पापियों को पाप से है तारती
ये अमर ग्रन्थ ये मुक्ति पन्थ,
ये पंचम वेद निराला,
नव ज्योति जलाने वाला ।
हरी नाम यही हरी धाम यही,
यही जग मंगल की आरती
पापियों को पाप से है तारती ॥
ये शान्ति गीत पावन पुनीत,
पापों को मिटाने वाला,
हरि दरश दिखाने वाला ।
यह सुख करनी, यह दुःख हरिनी,
श्री मधुसूदन की आरती,
पापियों को पाप से है तारती ॥
ये मधुर बोल, जग फन्द खोल
सन्मार्ग दिखानेवाला,
बिगड़ी को बनानेवाला ।
श्री राम यही, घनश्याम यही,
यही प्रभु की महिमा की आरती
पापियों को पाप से है तारती ॥
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श्री भगवत भगवान की है आरती Lyrics | Shree bhaagwat bhagwaan ki hai aarti lyrics

Ram Shalaka

Spiritual Knowledge & Publications

Category: Bhajan
Date: 10 Mar 2026

श्री भगवत भगवान की है आरती Lyrics | Shree bhaagwat bhagwaan ki hai aarti lyrics

सनातन धर्म में आरती केवल एक परंपरा नहीं — यह ईश्वर के प्रति समर्पण का वह पवित्र क्षण है जब भक्त और भगवान के बीच की दूरी मिट जाती है। और जब आरती श्रीमद् भागवत जैसे अमर ग्रंथ की हो — तो उसकी महिमा और भी असीम हो जाती है।

"श्री भगवत भगवान की है आरती, पापियों को पाप से है तारती" — यह पंक्ति सुनते ही मन में एक अलग ही भाव जागता है। यह आरती उस ग्रंथ की वंदना है जिसे पञ्चम वेद कहा गया है — जो न केवल ज्ञान का भंडार है, बल्कि हर पापी को पाप से मुक्त करने की, हर भटके को सन्मार्ग दिखाने की और हर टूटे हुए जीवन को संवारने की अद्भुत शक्ति रखता है।

श्रीमद् भागवत — जिसमें श्री हरि का नाम भी है, धाम भी है — वह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, वह जग के मंगल की आरती है। इसके मधुर बोल संसार के बंधनों को खोलते हैं, श्री मधुसूदन के दर्शन कराते हैं और जीवन में सुख लाते हैं, दुख हरते हैं।

चाहे आप श्री राम के भक्त हों या घनश्याम के दीवाने — यह आरती हर रूप में प्रभु की महिमा का गुणगान करती है और हर हृदय को पावन करती है।

आइए, इस पावन पुनीत शान्ति गीत के हर शब्द में उतरें और श्री भागवत भगवान की इस दिव्य आरती की महिमा को आत्मसात करें — 🙏

श्री भगवत भगवान की है आरती Lyrics | Shree bhaagwat bhagwaan ki hai aarti lyrics

श्री भगवत भगवान की है आरती
पापियों को पाप से है तारती
ये अमर ग्रन्थ ये मुक्ति पन्थ,
ये पंचम वेद निराला,
नव ज्योति जलाने वाला ।
हरी नाम यही हरी धाम यही,
यही जग मंगल की आरती
पापियों को पाप से है तारती ॥
ये शान्ति गीत पावन पुनीत,
पापों को मिटाने वाला,
हरि दरश दिखाने वाला ।
यह सुख करनी, यह दुःख हरिनी,
श्री मधुसूदन की आरती,
पापियों को पाप से है तारती ॥
ये मधुर बोल, जग फन्द खोल
सन्मार्ग दिखानेवाला,
बिगड़ी को बनानेवाला ।
श्री राम यही, घनश्याम यही,
यही प्रभु की महिमा की आरती
पापियों को पाप से है तारती ॥
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