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घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र - Ghoratkashta Stotra PDF

Stotra · · 710 Views

आज के इस लेख में आप घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र के बारे में जानेंगे। यह एक बहुत ही शक्तिशाली स्तोत्र है जिसका जाप करने से भक्त को जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। घोरकष्टोद्धरण एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है - गंभीर कष्टों से मुक्ति दिलाने वाला।

अगर आप भी जीवन के कष्टों को दूर करना चाहते हो और संकटों से मुक्ति चाहते हैं तो आपको घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र का पाठ जरूर करना चाहिए। यह स्तोत्र भगवान श्री दत्तात्रेय को समर्पित है जिसमे भक्त भगवन की कृपा और आशीर्वाद पाने की प्रार्थना करता है।

हमने अपने पिछले लेखों में कई अन्य स्तोत्र का वर्णन किया है आप उन्हें भी देख सकते है जैसे श्री गणेश स्तोत्र, आदित्य हृदय स्तोत्र, श्री गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र, श्री राम रक्षा स्तोत्र और सर्वोत्तम स्तोत्र

घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र (Ghoratkashta Stotra)

श्रीपाद श्रीवल्लभ त्वं सदैव । श्रीदत्तास्मान्पाहि देवाधि देव ।।
भावग्राह्य क्लेशहारिन्सुकीर्ते ।घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ॥___१

त्वं नो माता त्वं पिताप्तोऽधिपस्त्वं। त्राता योगक्षेमकृत्सदगुरूस्त्वं ।।
त्वं सर्वस्वं नो प्रभो विश्वमूर्ते ।घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ॥___२

पापं तापं व्याधिंमाधिं च दैन्यं । भीतिं क्लेशं त्वं हराऽशुत्व दैन्यम् ।।
त्रातारं नो वीक्ष ईशास्त जूर्ते । घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ॥___३

नान्यस्त्राता नापि दाता न भर्ता । त्वतो देव त्वं शरण्योऽकहर्ता ॥
कुर्वात्रेयानुग्रहं पुर्णराते । घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ॥___४

धर्मेप्रीतिं सन्मतिं देवभक्तिम्। सत्संगाप्तिम देहि भुक्तिं च मुक्तिम् ।।
भावासक्तिर्चाखिलानंदमूर्ते । घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ॥___५

॥श्लोकपंचकमेतद्यो लोकमंगलवर्धनम् ॥ प्रपठेन्नियतो भक्त्या स श्रीदत्तप्रियोभवेत् ॥

इति श्रीवासुदेवानंदसरस्वती स्वामीविरचितं घोरकष्टोद्धरण स्तोत्रम् संपूर्णम।

घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र का महत्व

घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र के पाठ से भक्त के जीवन के गंभीर से गंभीर कष्ट दूर हो जाते है। यह यह स्तोत्र उन सभी भक्तो के लिए एक वरदान है जो जीवन में चल रही और आने वाली कठिनाइयों और संकटों से मुक्ति चाहते हैं।

घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र के नियमित रूप से पाठ से भक्त को मन की शांति प्राप्त होती है, वह तनाव मुक्त रहता है, उसमे आत्मविश्वास की वृद्धि होती है तथा भगवान दत्तात्रेय की कृपा भक्त पर सदा बानी रहती है।

भक्त को घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र का पाठ करते समय मन को एकाग्र करके भगवान दत्तात्रेय की ओर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। शनिवार का दिन भगवान दत्तात्रेय को समर्पित होता है इसलिए इस दिन स्तोत्र का जाप करना विशेष फलदायी होता है।

Ghoratkashta Stotra PDF

अगर आप घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र की PDF ढूंढ रहे हो तो हमने आपके लिए बेस्ट PDF तैयार की है। इस PDF के माध्यम से आप प्रतिदन आसानी से घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र का जाप कर सकते हो और अपने जीवन के सभी कष्टों से मुक्त हो कर भगवान दत्तात्रेय की कृपा प्राप्त कर सकते हो।

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घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र - Ghoratkashta Stotra PDF

Ram Shalaka

Spiritual Knowledge & Publications

Category: Stotra
Date: 24 Oct 2024

घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र - Ghoratkashta Stotra PDF

आज के इस लेख में आप घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र के बारे में जानेंगे। यह एक बहुत ही शक्तिशाली स्तोत्र है जिसका जाप करने से भक्त को जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। घोरकष्टोद्धरण एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है - गंभीर कष्टों से मुक्ति दिलाने वाला।

अगर आप भी जीवन के कष्टों को दूर करना चाहते हो और संकटों से मुक्ति चाहते हैं तो आपको घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र का पाठ जरूर करना चाहिए। यह स्तोत्र भगवान श्री दत्तात्रेय को समर्पित है जिसमे भक्त भगवन की कृपा और आशीर्वाद पाने की प्रार्थना करता है।

हमने अपने पिछले लेखों में कई अन्य स्तोत्र का वर्णन किया है आप उन्हें भी देख सकते है जैसे श्री गणेश स्तोत्र, आदित्य हृदय स्तोत्र, श्री गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र, श्री राम रक्षा स्तोत्र और सर्वोत्तम स्तोत्र

घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र (Ghoratkashta Stotra)

श्रीपाद श्रीवल्लभ त्वं सदैव । श्रीदत्तास्मान्पाहि देवाधि देव ।।
भावग्राह्य क्लेशहारिन्सुकीर्ते ।घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ॥___१

त्वं नो माता त्वं पिताप्तोऽधिपस्त्वं। त्राता योगक्षेमकृत्सदगुरूस्त्वं ।।
त्वं सर्वस्वं नो प्रभो विश्वमूर्ते ।घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ॥___२

पापं तापं व्याधिंमाधिं च दैन्यं । भीतिं क्लेशं त्वं हराऽशुत्व दैन्यम् ।।
त्रातारं नो वीक्ष ईशास्त जूर्ते । घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ॥___३

नान्यस्त्राता नापि दाता न भर्ता । त्वतो देव त्वं शरण्योऽकहर्ता ॥
कुर्वात्रेयानुग्रहं पुर्णराते । घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ॥___४

धर्मेप्रीतिं सन्मतिं देवभक्तिम्। सत्संगाप्तिम देहि भुक्तिं च मुक्तिम् ।।
भावासक्तिर्चाखिलानंदमूर्ते । घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ॥___५

॥श्लोकपंचकमेतद्यो लोकमंगलवर्धनम् ॥ प्रपठेन्नियतो भक्त्या स श्रीदत्तप्रियोभवेत् ॥

इति श्रीवासुदेवानंदसरस्वती स्वामीविरचितं घोरकष्टोद्धरण स्तोत्रम् संपूर्णम।

घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र का महत्व

घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र के पाठ से भक्त के जीवन के गंभीर से गंभीर कष्ट दूर हो जाते है। यह यह स्तोत्र उन सभी भक्तो के लिए एक वरदान है जो जीवन में चल रही और आने वाली कठिनाइयों और संकटों से मुक्ति चाहते हैं।

घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र के नियमित रूप से पाठ से भक्त को मन की शांति प्राप्त होती है, वह तनाव मुक्त रहता है, उसमे आत्मविश्वास की वृद्धि होती है तथा भगवान दत्तात्रेय की कृपा भक्त पर सदा बानी रहती है।

भक्त को घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र का पाठ करते समय मन को एकाग्र करके भगवान दत्तात्रेय की ओर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। शनिवार का दिन भगवान दत्तात्रेय को समर्पित होता है इसलिए इस दिन स्तोत्र का जाप करना विशेष फलदायी होता है।

Ghoratkashta Stotra PDF

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Website: ramshalaka.in Spiritual PDF Document

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