हनुमान जी की आरती |Hanuman Ji Ki Aarti PDF

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हनुमान जी — जिनका नाम लेते ही मन में एक अद्भुत शक्ति और शांति का संचार होता है। वे भगवान श्री राम के परम भक्त, असीमित बल के स्वामी और संकट हरने वाले देवता हैं। हर मंगलवार और शनिवार को जब घर-घर में दीपक जलता है और भक्त हाथ जोड़कर खड़े होते हैं, तो "आरती कीजै हनुमान लला की..." की गूंज वातावरण को पवित्र और ऊर्जावान बना देती है।

लेकिन आज की व्यस्त जिंदगी में अक्सर हम आरती के सही शब्द याद नहीं रख पाते, या पूजा के समय किताब हाथ में नहीं होती। ऐसे में Hanuman Ji Ki Aarti PDF एक बेहद उपयोगी और सुविधाजनक समाधान है। इसे एक बार अपने फोन या कंप्यूटर में डाउनलोड करें, और फिर बिना इंटरनेट के भी कभी भी, कहीं भी पूजा करें — बिना किसी रुकावट के।

इस लेख में हम आपके लिए लेकर आए हैं हनुमान जी की सम्पूर्ण आरती का हिंदी पाठ, उसका अर्थ, महत्व और एक मुफ्त PDF डाउनलोड लिंक — ताकि आपकी भक्ति में कभी कोई बाधा न आए। चाहे आप नित्य पूजन करते हों, सुंदरकांड पाठ से पहले आरती गाते हों, या हनुमान जयंती पर विशेष पूजा का आयोजन कर रहे हों — यह PDF आपके लिए एक अमूल्य संग्रह साबित होगी।

तो आइए, बजरंगबली की भक्ति में डूबते हैं और उनकी कृपा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। 

Hanuman ji ki aarti

॥ श्री हनुमंत स्तुति ॥

मनोजवं मारुततुल्यवेगं,
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं,
श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥


॥ आरती ॥

आरती कीजै हनुमान लला की,
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

जाके बल से गिरिवर काँपे,
रोग-दोष जाके निकट न झाँके॥

अंजनि पुत्र महाबलदाई,
संतन के प्रभु सदा सहाई॥

आरती कीजै हनुमान लला की,
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

देवीरा रघुनाथ पठाए,
लंका जारि सिया सुधि लाए॥

लंका सो कोट समुद्र सी खाई,
जात पवनसुत बार न लाई॥

आरती कीजै हनुमान लला की॥

लंका जारि असुर संहारे,
सियाराम जी के काज सँवारे॥

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे,
लाए संजीवन प्राण उबारे॥

आरती कीजै हनुमान लला की॥

पैठि पाताल तोरि जमकारे,
अहिरावण की भुजा उखारे॥

बाएँ भुजा असुर दल मारे,
दाहिने भुजा संतजन तारे॥

आरती कीजै हनुमान लला की॥

सुर-नर-मुनि जन आरती उतारें,
जय जय जय हनुमान उचारें॥

कंचन थार कपूर लौ छाई,
आरती करत अंजना माई॥

आरती कीजै हनुमान लला की॥

जो हनुमानजी की आरती गावे,
बसहिं बैकुंठ परम पद पावे॥

लंका विध्वंस किए रघुराई,
तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई॥

आरती कीजै हनुमान लला की,
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

हनुमान जी की आरती PDF 

हनुमान जी की आरती हिंदू धर्म में सबसे अधिक गाई जाने वाली और मन को शांति देने वाली स्तुतियों में से एक है। "आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की" — ये पंक्तियाँ सुनते ही हर भक्त का हृदय श्रद्धा और भक्ति से भर जाता है। आज के डिजिटल युग में जहाँ सब कुछ मोबाइल और इंटरनेट पर उपलब्ध है, वहाँ Hanuman Ji Ki Aarti PDF एक बेहद व्यावहारिक और उपयोगी विकल्प बनकर उभरी है। इस PDF को एक बार डाउनलोड करने के बाद आप इसे बिना इंटरनेट के भी पढ़ सकते हैं, प्रिंट करके मंदिर में लगा सकते हैं, या परिवार के बुजुर्गों के साथ साझा कर सकते हैं जो बड़े अक्षरों में आरती पढ़ना पसंद करते हैं। खासकर मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती और राम नवमी जैसे पावन अवसरों पर यह PDF बहुत काम आती है। इसमें आरती के सभी छंद शुद्ध हिंदी में दिए जाते हैं, जिससे उच्चारण सटीक रहता है और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। यदि आप सच्चे मन से बजरंगबली की भक्ति करना चाहते हैं, तो यह PDF आपकी दैनिक पूजा को और अधिक सुव्यवस्थित, श्रद्धापूर्ण और फलदायी बना सकती है।

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