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चामुण्डा माता चालीसा - Chamunda Devi Chalisa PDF

Chalisa · · 663 Views

चामुंडा माता शक्ति और संहार के प्रतीक है चामुंडा माता को नवदुर्गा के रूप में भी पूजा जाता है। माता काली चामुंडा देवी के रूप में जाने जाती है मां का नाम चामुंडा देवी इसीलिए पड़ा क्यों की उन्होंने चण्ड-मुण्ड नामक असुरों का संहार किया।

हिमाचल प्रदेश में माता चामुंडा का प्रसिद्ध मंदिर चामुंडा नंदिकेश्वर धाम है जहां पर हमेशा श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। इस पेज में आप चामुण्डा देवी चालीसा जानेगे तोह आइये अब बिना देरी किये चामुंडा माता चालीसा की ओर भक्ति भाव से आगे बढ़ते हैं।

चामुण्डा माता चालीसा (Chamunda Mata Chalisa)

माता चामुण्डा चालीसा यहाँ पर है जिसे भक्ति भाव से प्रतदिन पाठ करने से सभी दुखो का निवारण होता है और साथ ही कोई भय व शत्रु सताता है। तो आइये दोहे से चामुंडा देवी चालीसा का प्रारम्भ करते है।

------॥दोहा॥------

नीलवरण माँ कालिका रहती सदा प्रचंड।
दस हाथो मई ससत्रा धार देती दुष्ट को दंड॥१॥

मधु केटभ संहार कर करी धर्म की जीत।
मेरी भी पीड़ा हरो हो जो कर्म पुनीत॥२॥

------॥चौपाई॥------

नमस्कार चामुंडा माता।
तीनो लोक मई मई विख्याता॥१॥
हिमाल्या मई पवितरा धाम है ।
महाशक्ति तुमको प्रणाम है॥२॥

मार्कंडिए ऋषि ने धीयया ।
कैसे प्रगती भेद बताया॥३॥
सूभ निसुभ दो डेतिए बलसाली ।
तीनो लोक जो कर दिए खाली॥४॥

वायु अग्नि याँ कुबेर संग ।
सूर्या चंद्रा वरुण हुए तंग॥५॥
अपमानित चर्नो मई आए ।
गिरिराज हिमआलये को लाए॥६॥

भद्रा-रॉंद्र्रा निट्टया धीयया ।
चेतन शक्ति करके बुलाया॥७॥
क्रोधित होकर काली आई ।
जिसने अपनी लीला दिखाई॥८॥

चंदड़ मूंदड़ ओर सुंभ पतए ।
कामुक वेरी लड़ने आए॥९॥
पहले सुग्गृीव दूत को मारा ।
भगा चंदड़ भी मारा मारा॥१०॥

अरबो सैनिक लेकर आया ।
द्रहूँ लॉकंगन क्रोध दिखाया॥११॥
जैसे ही दुस्त ललकारा ।
हा उ सबद्ड गुंजा के मार॥१२॥

सेना ने मचाई भगदड़ ।
फादा सिंग ने आया जो बाद॥१३॥
हत्टिया करने चंदड़-मूंदड़ आए ।
मदिरा पीकेर के घुर्रई॥१४॥

चतुरंगी सेना संग लाए ।
उचे उचे सीविएर गिराई॥१५॥
तुमने क्रोधित रूप निकाला ।
प्रगती डाल गले मूंद माला॥१६॥

चर्म की सॅडी चीते वाली ।
हड्डी ढ़ाचा था बलसाली॥१७॥
विकराल मुखी आँखे दिखलाई ।
जिसे देख सृष्टि घबराई॥१८॥

चंदड़ मूंदड़ ने चकरा चलाया ।
ले तलवार हू साबद गूंजाया॥१९॥
पपियो का कर दिया निस्तरा ।
चंदड़ मूंदड़ दोनो को मार॥२०॥

हाथ मई मस्तक ले मुस्काई ।
पापी सेना फिर घबराई॥२१॥
सरस्वती मा तुम्हे पुकारा ।
पड़ा चामुंडा नाम तिहर॥२२॥

चंदड़ मूंदड़ की मिरतट्यु सुनकर ।
कालक मौर्या आए रात पर॥२३॥
अरब खराब युध के पाठ पर ।
झोक दिए सब चामुंडा पर॥२४॥

उगर्र चंडिका प्रगती आकर ।
गीडदीयो की वाडी भरकर॥२५॥
काली ख़टवांग घुसो से मारा ।
ब्रह्माड्ड ने फेकि जल धारा॥२६॥

माहेश्वरी ने त्रिशूल चलाया ।
मा वेश्दवी कक्करा घुमाया॥२७॥
कार्तिके के शक्ति आई ।
नार्सिंघई दित्तियो पे छाई॥२८॥

चुन चुन सिंग सभी को खाया ।
हर दानव घायल घबराया॥२९॥
रक्टतबीज माया फेलाई ।
शक्ति उसने नई दिखाई॥३०॥

रक्त्त गिरा जब धरती ऊपर ।
नया डेतिए प्रगता था वही पर॥३१॥
चाँदी मा अब शूल घुमाया ।
मारा उसको लहू चूसाया॥३२॥

सूभ निसुभ अब डोडे आए ।
सततर सेना भरकर लाए॥३३॥
वज्रपात संग सूल चलाया ।
सभी देवता कुछ घबराई॥३४॥

ललकारा फिर घुसा मारा ।
ले त्रिशूल किया निस्तरा॥३५॥
सुभ निसुभ धरती पर सोए ।
डेतिए सभी देखकर रोए॥३६॥

कहमुंडा मा धृम बचाया ।
अपना शुभ मंदिर बनवाया॥३७॥
सभी देवता आके मानते ।
हनुमत भेराव चवर दुलते॥३८॥

आसवीं चेट नवराततरे अओ ।
धवजा नारियल भेंट चाड़ौ॥३९॥
वांडर नदी सनन करऔ ।
चामुंडा मा तुमको पियौ॥४०॥

------॥दोहा॥------

शरणागत को शक्ति दो हे जग की आधार।
‘ओम’ ये नैया डोलती कर दो भाव से पार॥

चामुण्डा माता चालीसा के लाभ

चामुण्डा माता चालीसा के प्रतिदिन पाठ से भक्त की निरंतर वृद्धि होती है। भक्त सभी दुखो तथा भय से मुक्त रहता है उसे जीवन में शांति तथा समृद्धि प्राप्त  होती है। चालीसा के पाठ से चामुण्डा माता की कृपा भक्त के साथ साथ भक्त के पुरे परिवार पर बनी रहती है। 

अगर आपके जीवन में कोई दुःख, दर्द, या अशांति है तोह आपको चामुण्डा चालीसा का पाठ प्रतिदिन करना चाहिए। इस से आपके जीवन में सुखद परिवर्तन आना शुरू हो जायेंगे। 

Chamunda Devi Chalisa PDF

हमने आपके लिए चामुण्डा देवी चालीसा की एक बेहतरीन PDF तैयार की है जिसे आप हमारे द्वारा खरीद सकते हो। PDF के माध्यम से आप देवी चामुण्डा चालीसा का पाठ प्रतिदिन आसानी से कर सकते हो और अपने जीवन सुखद बदलाव ला सकते हो।

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चामुण्डा माता चालीसा - Chamunda Devi Chalisa PDF

Ram Shalaka

Spiritual Knowledge & Publications

Category: Chalisa
Date: 10 Oct 2024

चामुण्डा माता चालीसा - Chamunda Devi Chalisa PDF

चामुंडा माता शक्ति और संहार के प्रतीक है चामुंडा माता को नवदुर्गा के रूप में भी पूजा जाता है। माता काली चामुंडा देवी के रूप में जाने जाती है मां का नाम चामुंडा देवी इसीलिए पड़ा क्यों की उन्होंने चण्ड-मुण्ड नामक असुरों का संहार किया।

हिमाचल प्रदेश में माता चामुंडा का प्रसिद्ध मंदिर चामुंडा नंदिकेश्वर धाम है जहां पर हमेशा श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। इस पेज में आप चामुण्डा देवी चालीसा जानेगे तोह आइये अब बिना देरी किये चामुंडा माता चालीसा की ओर भक्ति भाव से आगे बढ़ते हैं।

चामुण्डा माता चालीसा (Chamunda Mata Chalisa)

माता चामुण्डा चालीसा यहाँ पर है जिसे भक्ति भाव से प्रतदिन पाठ करने से सभी दुखो का निवारण होता है और साथ ही कोई भय व शत्रु सताता है। तो आइये दोहे से चामुंडा देवी चालीसा का प्रारम्भ करते है।

------॥दोहा॥------

नीलवरण माँ कालिका रहती सदा प्रचंड।
दस हाथो मई ससत्रा धार देती दुष्ट को दंड॥१॥

मधु केटभ संहार कर करी धर्म की जीत।
मेरी भी पीड़ा हरो हो जो कर्म पुनीत॥२॥

------॥चौपाई॥------

नमस्कार चामुंडा माता।
तीनो लोक मई मई विख्याता॥१॥
हिमाल्या मई पवितरा धाम है ।
महाशक्ति तुमको प्रणाम है॥२॥

मार्कंडिए ऋषि ने धीयया ।
कैसे प्रगती भेद बताया॥३॥
सूभ निसुभ दो डेतिए बलसाली ।
तीनो लोक जो कर दिए खाली॥४॥

वायु अग्नि याँ कुबेर संग ।
सूर्या चंद्रा वरुण हुए तंग॥५॥
अपमानित चर्नो मई आए ।
गिरिराज हिमआलये को लाए॥६॥

भद्रा-रॉंद्र्रा निट्टया धीयया ।
चेतन शक्ति करके बुलाया॥७॥
क्रोधित होकर काली आई ।
जिसने अपनी लीला दिखाई॥८॥

चंदड़ मूंदड़ ओर सुंभ पतए ।
कामुक वेरी लड़ने आए॥९॥
पहले सुग्गृीव दूत को मारा ।
भगा चंदड़ भी मारा मारा॥१०॥

अरबो सैनिक लेकर आया ।
द्रहूँ लॉकंगन क्रोध दिखाया॥११॥
जैसे ही दुस्त ललकारा ।
हा उ सबद्ड गुंजा के मार॥१२॥

सेना ने मचाई भगदड़ ।
फादा सिंग ने आया जो बाद॥१३॥
हत्टिया करने चंदड़-मूंदड़ आए ।
मदिरा पीकेर के घुर्रई॥१४॥

चतुरंगी सेना संग लाए ।
उचे उचे सीविएर गिराई॥१५॥
तुमने क्रोधित रूप निकाला ।
प्रगती डाल गले मूंद माला॥१६॥

चर्म की सॅडी चीते वाली ।
हड्डी ढ़ाचा था बलसाली॥१७॥
विकराल मुखी आँखे दिखलाई ।
जिसे देख सृष्टि घबराई॥१८॥

चंदड़ मूंदड़ ने चकरा चलाया ।
ले तलवार हू साबद गूंजाया॥१९॥
पपियो का कर दिया निस्तरा ।
चंदड़ मूंदड़ दोनो को मार॥२०॥

हाथ मई मस्तक ले मुस्काई ।
पापी सेना फिर घबराई॥२१॥
सरस्वती मा तुम्हे पुकारा ।
पड़ा चामुंडा नाम तिहर॥२२॥

चंदड़ मूंदड़ की मिरतट्यु सुनकर ।
कालक मौर्या आए रात पर॥२३॥
अरब खराब युध के पाठ पर ।
झोक दिए सब चामुंडा पर॥२४॥

उगर्र चंडिका प्रगती आकर ।
गीडदीयो की वाडी भरकर॥२५॥
काली ख़टवांग घुसो से मारा ।
ब्रह्माड्ड ने फेकि जल धारा॥२६॥

माहेश्वरी ने त्रिशूल चलाया ।
मा वेश्दवी कक्करा घुमाया॥२७॥
कार्तिके के शक्ति आई ।
नार्सिंघई दित्तियो पे छाई॥२८॥

चुन चुन सिंग सभी को खाया ।
हर दानव घायल घबराया॥२९॥
रक्टतबीज माया फेलाई ।
शक्ति उसने नई दिखाई॥३०॥

रक्त्त गिरा जब धरती ऊपर ।
नया डेतिए प्रगता था वही पर॥३१॥
चाँदी मा अब शूल घुमाया ।
मारा उसको लहू चूसाया॥३२॥

सूभ निसुभ अब डोडे आए ।
सततर सेना भरकर लाए॥३३॥
वज्रपात संग सूल चलाया ।
सभी देवता कुछ घबराई॥३४॥

ललकारा फिर घुसा मारा ।
ले त्रिशूल किया निस्तरा॥३५॥
सुभ निसुभ धरती पर सोए ।
डेतिए सभी देखकर रोए॥३६॥

कहमुंडा मा धृम बचाया ।
अपना शुभ मंदिर बनवाया॥३७॥
सभी देवता आके मानते ।
हनुमत भेराव चवर दुलते॥३८॥

आसवीं चेट नवराततरे अओ ।
धवजा नारियल भेंट चाड़ौ॥३९॥
वांडर नदी सनन करऔ ।
चामुंडा मा तुमको पियौ॥४०॥

------॥दोहा॥------

शरणागत को शक्ति दो हे जग की आधार।
‘ओम’ ये नैया डोलती कर दो भाव से पार॥

चामुण्डा माता चालीसा के लाभ

चामुण्डा माता चालीसा के प्रतिदिन पाठ से भक्त की निरंतर वृद्धि होती है। भक्त सभी दुखो तथा भय से मुक्त रहता है उसे जीवन में शांति तथा समृद्धि प्राप्त  होती है। चालीसा के पाठ से चामुण्डा माता की कृपा भक्त के साथ साथ भक्त के पुरे परिवार पर बनी रहती है। 

अगर आपके जीवन में कोई दुःख, दर्द, या अशांति है तोह आपको चामुण्डा चालीसा का पाठ प्रतिदिन करना चाहिए। इस से आपके जीवन में सुखद परिवर्तन आना शुरू हो जायेंगे। 

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