काली कमली वाला मेरा यार है kali kamli wala mera yaar hai mere man ka mohan tu dildaar hai lyrics

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जब मन की गहराइयों में कोई पुकार उठती है, जब आँखें बिन कहे रो पड़ती हैं, और जब होठों पर बिना किसी कोशिश के बस एक ही नाम आता है — "मोहन" — तो समझ लीजिए, यह भक्ति का वह रंग है जो एक बार चढ़ जाए, तो उतरता नहीं।

"काली कमली वाला मेरा यार है" — यह सिर्फ एक भजन नहीं, यह एक दीवाने दिल की फरियाद है। यह उस भक्त की आवाज़ है जिसने श्याम को अपना दोस्त माना है, अपना सहारा माना है, अपनी ज़िंदगी की पतवार माना है।

चित्र विचित्र जी की मधुर आवाज़ में जब यह बोल गूँजते हैं — "ओ गिरिधर, ओ काहना, ओ ग्वाला, नंदलाला... तू आ ना, तरसा ना" — तो हर सुनने वाले का मन खिंचा चला जाता है उस गोकुल की गलियों में, जहाँ एक काली कमली ओढ़े, बाँसुरी थामे वह नटखट कन्हैया आज भी अपने भक्तों के दिलों में बसता है।

इस भजन में प्रेम है, विश्वास है, समर्पण है — और सबसे बढ़कर है वह "पागल प्रीत" जो बस दर्शन की प्यासी है, किसी और चीज़ की नहीं।

आइए, इस अलौकिक भजन की भावनाओं में डूबते हैं और समझते हैं कि आखिर क्यों काली कमली वाला वह यार, आज भी करोड़ों दिलों का दिलदार है। 🙏

काली कमली वाला मेरा यार है lyrics

kali kamli wala mera yaar hai mere man ka mohan tu dildaar hai

ओ गिरिधर, ओ काहना, ओ ग्वाला, नंदलाला,
मेरे मोहन, मेरे काहना, तू आ ना, तरसा ना ।

काली कमली वाला मेरा यार है,
मेरे मन का मोहन तू दिलदार है ।
तू मेरा यार है, मेरा दिलदार है ॥

मन मोहन मैं तेरा दीवाना, गाउँ बस अब यही तराना ।
श्याम सलोने तू मेरा रिजवार है, मेरे मन का मोहन तू दिलदार है ॥

तू मेरा मैं तेरा प्यारे, यह जीवन अब तेरे सहारे ।
तेरे हाथ इस जीवन की पतवार है, मेरे मन का मोहन तू दिलदार है ॥

पागल प्रीत की एक ही आशा, दर्दे दिल दर्शन का प्यासा ।
तेरे हर वादे पे मुझे ऐतबार है, मेरे मन का मोहन तू दिलदार है ॥

तुझको अपना मान लिया है, यह जीवन तेरे नाम किया है ।
चित्र विचित्र को बस तुमसे ही प्यार है, मेरे मन का मोहन तू दिलदार है ॥

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