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श्री नमिनाथ चालीसा - Naminath Chalisa PDF

Chalisa · · 524 Views

आप अगर जैन धर्म के अनुयाई है तो आपको श्री नमिनाथ चालीसा का पाठ करना चाहिए इससे आपके जीवन में सुखद बदलाव आना शुरू हो जाएंगे। नमिनाथ भगवान जैन धर्म के 21वें तीर्थंकर हैं और उनकी चालीसा बिल्कुल कल्पवृक्ष के समान है जिसका शुद्ध मन से प्रतिदिन पाठ करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है।

श्री नमिनाथ भगवान श्री कृष्ण के चचेरे भाई थे और उनका जन्म शौरीपुर में हुआ था। जैन समाज में श्री नमिनाथ भगवान का बहुत सम्मान है और उन्हें पूजा जाता है इसके साथ ही उनका जन्म स्थल शौरीपुर मैं कई जैन समाज के लोग प्रतिवर्ष पूजा करने के लिए आते है।

आइये अब बिना किसी देरी के भगवान श्री नमिनाथ चालीसा की और आगे बढ़ते है और श्रद्धापूर्वक पाठ करते है।

श्री नमिनाथ चालीसा (Naminath Chalisa)

सतत पूज्यनीय भगवान, नमिनाथ जिन महिमावान ।
भक्त करें जो मन में ध्याय, पा जाते मुक्ति वरदान ।

*******

जय श्री नमिनाथ जिन स्वामी, वसु गुण मण्डित प्रभु प्रणमामि ।
मिथिला नगरी प्रान्त बिहार, श्री विजय राज्य करें हितकर ।----१----।
विप्रा देवी महारानी थीं, रूप गुणों की वे खानि थीं ।
कृष्णाश्विन द्वितीया सुखदाता, षोडश स्वप्न देखती माता ।----२----।

अपराजित विमान को तजकर, जननी उदर वसे प्रभु आकर ।
कृष्ण आषाढ़ दशमी सुखकार, भूतल पर हुआ प्रभु अवतार ।----३----।
आयु सहस दस वर्ष प्रभु की, धनु पन्द्रह अवगाहना उनकी ।
तरुण हुए जब राजकुमार, हुआ विवाह तब आनन्दकार ।----४----।

एक दिन भ्रमण करें उपवन में, वर्षा ऋतु में हर्षित मन में ।
नमस्कार करके दो देव, कारण कहने लगे स्वयमेव ।----५----।
ज्ञात हुआ है क्षेत्र विदेह में, भावी तीर्थंकर तुम जग में ।
देवों से सुनकर ये बात, राजमहल लौटे नमिनाथ ।----६----।

सोच हुआ भव-भव ने भ्रमण का, चिन्तन करते रहे मोचन का ।
परम दिगम्बर व्रत करूँ अर्जन, रत्नत्रयधन करूँ उपार्जन ।----७----।
सुप्रभ सुत को राज सौंपकर, गए चित्रवन ने श्री जिनवर ।
दशमी आषाढ़ मास की कारी, सहस नृपति संग दीक्षाधारी ।----८----।

दो दिन का उपवास धारकर, आतम लीन हुए श्री प्रभुवर ।
तीसरे दिन जब किया विहार, भूप वीरपुर दें आहार ।----९----।
नौ वर्षों तक तप किया वन में, एक दिन मौलि श्री तरु तल में ।
अनुभूति हुई दिव्याभास, शुक्ल एकादशी मंगसिर मास ।----१०----।

नमिनाथ हुए ज्ञान के सागर, ज्ञानोत्सव करते सुर आकर ।
समोशरण था सभी विभूषित, मानस्तम्भ थे चार सुशोभित ।----११----।
हुआ मौनभंग दिव्य धवनि से, सब दुख दूर हुए अवनि से ।
आत्म पदार्थ की सत्ता सिद्ध, करता तन ने अहम् प्रसिद्ध ।----१२----।

बाह्य़ोन्द्रियों में करण के द्वारा, अनुभव से कर्ता स्वीकारा ।
पर-परिणति से ही यह जीव, चतुर्गति में भ्रमे सदीव ।----१३----।
रहे नरक सागर पर्यन्त, सहे भूख प्यास तिर्यन्च ।
हुआ मनुज तो भी संक्लेश, देवों में भी ईष्या-द्वेष ।----१४----।

नहीं सुखों का कहीं ठिकाना, सच्चा सुख तो मोक्ष में माना ।
मोक्ष गति का द्वार है एक, नरभव से ही पाये नेक ।----१५----।
सुन कर मगन हुए सब सुरगण, व्रत धारण करते श्रावक जन ।
हुआ विहार जहाँ भी प्रभु का, हुआ वहीं कल्याण सभी का ।----१६----।

करते रहे विहार जिनेश, एक मास रही आयु शेष ।
शिखर सम्मेद के ऊपर जाकर, प्रतिमा योग धरा हर्षा कर ।----१७----।
शुक्ल ध्यान की अग्नि प्रजारी, हने अघाति कर्म दुखकारी ।
अजर-अमर-शाश्वत पद पाया, सुर-नर सबका मन हर्षाया ।----१८----।

*******

शुभ निर्वाण महोत्सव करते, कूट मित्रधर पूजन करते ।
प्रभु हैं नीलकमल से अलंकृत, हम हों उत्तम फ़ल से उपकृत ।
नमिनाथ स्वामी जगवन्दन, अरुणा करती प्रभु-अभिवन्दन ।

श्री नमिनाथ चालीसा के लाभ

श्री नमिनाथ चालीसा भक्ति भाव से पाठ करने के कई लाभ है इसमें मुख्य रूप से भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है, मन की शांति मिलती है, जीवन में सुख समृद्धि आना शुरू हो जाते हैं, पापों से मुक्ति मिलती है, और साथ ही आध्यात्मिक क्षेत्र में उन्नति होती है।

श्री नमिनाथ चालीसा का पाठ करने का तरीका

नमिनाथ चालीसा का पाठ आप प्रतिदिन कर सकते हैं इसे आप जैन मंदिर तथा अपने घर पर भी पाठ कर सकते हैं। इसके पाठ के लिए आप जमीन पर आसान बिछाकर बैठकर पाठ कर सकते हैं या फिर आप इसका पाठ खड़े-खड़े भी कर सकते हैं। इसके अलावा आप इसका पाठ मंत्रों के साथ गाकर भी कर सकते हैं।

Naminath Chalisa PDF

अगर आप श्री नमिनाथ चालीसा की हाई क्वालिटी पीडीएफ पाना चाहते हैं जिससे आप बड़े ही आसानी से प्रतिदिन इसका पाठ कर सकते हैं और जीवन में सुख समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं। तो इसके लिए आप पीडीएफ को हमारे द्वारा खरीद सकते हैं यहाँ आपको बहुत ही कम कीमत में बेस्ट क्वालिटी पीडीएफ मिलेगी।

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श्री नमिनाथ चालीसा - Naminath Chalisa PDF

Ram Shalaka

Spiritual Knowledge & Publications

Category: Chalisa
Date: 13 Oct 2024

श्री नमिनाथ चालीसा - Naminath Chalisa PDF

आप अगर जैन धर्म के अनुयाई है तो आपको श्री नमिनाथ चालीसा का पाठ करना चाहिए इससे आपके जीवन में सुखद बदलाव आना शुरू हो जाएंगे। नमिनाथ भगवान जैन धर्म के 21वें तीर्थंकर हैं और उनकी चालीसा बिल्कुल कल्पवृक्ष के समान है जिसका शुद्ध मन से प्रतिदिन पाठ करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है।

श्री नमिनाथ भगवान श्री कृष्ण के चचेरे भाई थे और उनका जन्म शौरीपुर में हुआ था। जैन समाज में श्री नमिनाथ भगवान का बहुत सम्मान है और उन्हें पूजा जाता है इसके साथ ही उनका जन्म स्थल शौरीपुर मैं कई जैन समाज के लोग प्रतिवर्ष पूजा करने के लिए आते है।

आइये अब बिना किसी देरी के भगवान श्री नमिनाथ चालीसा की और आगे बढ़ते है और श्रद्धापूर्वक पाठ करते है।

श्री नमिनाथ चालीसा (Naminath Chalisa)

सतत पूज्यनीय भगवान, नमिनाथ जिन महिमावान ।
भक्त करें जो मन में ध्याय, पा जाते मुक्ति वरदान ।

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जय श्री नमिनाथ जिन स्वामी, वसु गुण मण्डित प्रभु प्रणमामि ।
मिथिला नगरी प्रान्त बिहार, श्री विजय राज्य करें हितकर ।----१----।
विप्रा देवी महारानी थीं, रूप गुणों की वे खानि थीं ।
कृष्णाश्विन द्वितीया सुखदाता, षोडश स्वप्न देखती माता ।----२----।

अपराजित विमान को तजकर, जननी उदर वसे प्रभु आकर ।
कृष्ण आषाढ़ दशमी सुखकार, भूतल पर हुआ प्रभु अवतार ।----३----।
आयु सहस दस वर्ष प्रभु की, धनु पन्द्रह अवगाहना उनकी ।
तरुण हुए जब राजकुमार, हुआ विवाह तब आनन्दकार ।----४----।

एक दिन भ्रमण करें उपवन में, वर्षा ऋतु में हर्षित मन में ।
नमस्कार करके दो देव, कारण कहने लगे स्वयमेव ।----५----।
ज्ञात हुआ है क्षेत्र विदेह में, भावी तीर्थंकर तुम जग में ।
देवों से सुनकर ये बात, राजमहल लौटे नमिनाथ ।----६----।

सोच हुआ भव-भव ने भ्रमण का, चिन्तन करते रहे मोचन का ।
परम दिगम्बर व्रत करूँ अर्जन, रत्नत्रयधन करूँ उपार्जन ।----७----।
सुप्रभ सुत को राज सौंपकर, गए चित्रवन ने श्री जिनवर ।
दशमी आषाढ़ मास की कारी, सहस नृपति संग दीक्षाधारी ।----८----।

दो दिन का उपवास धारकर, आतम लीन हुए श्री प्रभुवर ।
तीसरे दिन जब किया विहार, भूप वीरपुर दें आहार ।----९----।
नौ वर्षों तक तप किया वन में, एक दिन मौलि श्री तरु तल में ।
अनुभूति हुई दिव्याभास, शुक्ल एकादशी मंगसिर मास ।----१०----।

नमिनाथ हुए ज्ञान के सागर, ज्ञानोत्सव करते सुर आकर ।
समोशरण था सभी विभूषित, मानस्तम्भ थे चार सुशोभित ।----११----।
हुआ मौनभंग दिव्य धवनि से, सब दुख दूर हुए अवनि से ।
आत्म पदार्थ की सत्ता सिद्ध, करता तन ने अहम् प्रसिद्ध ।----१२----।

बाह्य़ोन्द्रियों में करण के द्वारा, अनुभव से कर्ता स्वीकारा ।
पर-परिणति से ही यह जीव, चतुर्गति में भ्रमे सदीव ।----१३----।
रहे नरक सागर पर्यन्त, सहे भूख प्यास तिर्यन्च ।
हुआ मनुज तो भी संक्लेश, देवों में भी ईष्या-द्वेष ।----१४----।

नहीं सुखों का कहीं ठिकाना, सच्चा सुख तो मोक्ष में माना ।
मोक्ष गति का द्वार है एक, नरभव से ही पाये नेक ।----१५----।
सुन कर मगन हुए सब सुरगण, व्रत धारण करते श्रावक जन ।
हुआ विहार जहाँ भी प्रभु का, हुआ वहीं कल्याण सभी का ।----१६----।

करते रहे विहार जिनेश, एक मास रही आयु शेष ।
शिखर सम्मेद के ऊपर जाकर, प्रतिमा योग धरा हर्षा कर ।----१७----।
शुक्ल ध्यान की अग्नि प्रजारी, हने अघाति कर्म दुखकारी ।
अजर-अमर-शाश्वत पद पाया, सुर-नर सबका मन हर्षाया ।----१८----।

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शुभ निर्वाण महोत्सव करते, कूट मित्रधर पूजन करते ।
प्रभु हैं नीलकमल से अलंकृत, हम हों उत्तम फ़ल से उपकृत ।
नमिनाथ स्वामी जगवन्दन, अरुणा करती प्रभु-अभिवन्दन ।

श्री नमिनाथ चालीसा के लाभ

श्री नमिनाथ चालीसा भक्ति भाव से पाठ करने के कई लाभ है इसमें मुख्य रूप से भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है, मन की शांति मिलती है, जीवन में सुख समृद्धि आना शुरू हो जाते हैं, पापों से मुक्ति मिलती है, और साथ ही आध्यात्मिक क्षेत्र में उन्नति होती है।

श्री नमिनाथ चालीसा का पाठ करने का तरीका

नमिनाथ चालीसा का पाठ आप प्रतिदिन कर सकते हैं इसे आप जैन मंदिर तथा अपने घर पर भी पाठ कर सकते हैं। इसके पाठ के लिए आप जमीन पर आसान बिछाकर बैठकर पाठ कर सकते हैं या फिर आप इसका पाठ खड़े-खड़े भी कर सकते हैं। इसके अलावा आप इसका पाठ मंत्रों के साथ गाकर भी कर सकते हैं।

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अगर आप श्री नमिनाथ चालीसा की हाई क्वालिटी पीडीएफ पाना चाहते हैं जिससे आप बड़े ही आसानी से प्रतिदिन इसका पाठ कर सकते हैं और जीवन में सुख समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं। तो इसके लिए आप पीडीएफ को हमारे द्वारा खरीद सकते हैं यहाँ आपको बहुत ही कम कीमत में बेस्ट क्वालिटी पीडीएफ मिलेगी।

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