तारा भवानी चालीसा | Tara Bhawani Mata Chalisa

Ram Shalaka
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तारा भवानी माता को समर्पित यह चालीसा भक्तों के लिए भक्ति और आस्था का एक सुंदर माध्यम है। माना जाता है कि माता का हर दिन पाठ करने से मन को शांति मिलती है और जीवन की परेशानियों का सामना करने के लिए हिम्मत मिलती है।

॥ तारा भवानी चालीसा ॥

तारा भवानी माता को समर्पित यह चालीसा भक्तों के लिए श्रद्धा और भक्ति का एक सुंदर माध्यम है। माना जाता है कि माता का नियमित पाठ मन को शांति देता है और जीवन में आने वाली परेशानियों का सामना करने का साहस बढ़ाता है।

॥ दोहा ॥

श्री गणपति गुरु गौरी, पूजिहउं सिर नाइ।
तारा बल जल सोखनि, बिमल विद्या दाइ॥

॥ चालीसा ॥

नमो नमो तारा जगदम्बा।
तुम बिन होत न होई अम्बा॥

जय हेमवती जय जगदम्बे।
जय अचला जय दुर्गे अम्बे॥

शिवशंकर की तुम हो प्यारी।
करहुं कृपा मति हो संहारी॥

जय गायत्री वेद की माता।
तुम बिन काहु न सुघर विधाता॥

ब्रह्मा विष्णु महेश सवारी।
तीनों देव तुम्हारे पुजारी॥

करहुं दया मति ममता भारी।
हम सबकी तुम हो हितकारी॥

सृष्टि पालन तुम्हारे बस में।
तुम्ह बिन कहुं न दूजा जग में॥

रक्षक हो तुम परम विशाल।
तुम्हरा कृपा सदा सुफल॥

शरणागत की तुम हो माता।
कृपा करो अम्बे विघ्न हटा॥

शत्रु विनाशिनी मति हो माती।
तुम्ह बिन पूर्ण कहुं नहि पाती॥

भव सागर सब पार करावे।
तारा भवानी कृपा बरसावे॥

संत जनों की तुम हो प्यारी।
तुम्ह बिन होत न कोई भिखारी॥

रिद्धि सिद्धि की तुम हो दाता।
विपत्ति हरो सबकी विधाता॥

दीन हीन के दुख हरणी।
तुम हो सबकी अधिपति मरणी॥

अघट की तुम हो महिमा भारी।
तुम बिन सृष्टि न कोई उधारी॥

शरणागत को ना तजना।
तुम बिन कौन करू उद्धार॥

कृपा दृष्टि करहुं हम पर।
सुख संपत्ति होय घर घर॥

दया करो अब तुम मति मारी।
हम पर अम्बे कृपा उतारी॥

॥ दोहा ॥

शरणागत की रक्षा करु, दुष्ट दलन कर पाय।
तारा भवानी मति मति, संकट दूर कराय॥

तारा भवानी चालीसा का महत्व

तारा भवानी चालीसा माता तारा भवानी की भक्ति और पूजा का एक सरल माध्यम है। भक्त माता का हर दिन पाठ करके उनके आशीर्वाद की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि माता का नाम लेने और चालीसा पढ़ने से मन को शांति मिलती है और मुश्किल समय में हिम्मत बनी रहती है।

चालीसा में माता को जगदम्बा, दुर्गा, गायत्री और रक्षक के रूप में याद किया गया है। इसमें माता से जीवन के दुख, संकट और परेशानियां दूर करने तथा घर में सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना की गई है।

तारा भवानी चालीसा PDF

अगर आप तारा भवानी चालीसा का पाठ हर दिन करना चाहते हैं, तो इसका PDF अपने मोबाइल या कंप्यूटर में सेव करके रख सकते हैं। नीचे दिए गए Download Button पर क्लिक करके तारा भवानी चालीसा PDF आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं।

तारा भवानी चालीसा | Tara Bhawani Mata Chalisa
Free PDF Available 05 Sep 2026

तारा भवानी चालीसा | Tara Bhawani Mata Chalisa

तारा भवानी चालीसा का संपूर्ण पाठ पढ़ें। जानें तारा भवानी चालीसा का महत्व, लाभ और पाठ करने का सही तरीका, साथ ही PDF आसानी से डाउनलोड करें।

Ram Shalaka

Spiritual Knowledge & Publications

Category: Chalisa
Date: 05 Sep 2026

तारा भवानी चालीसा | Tara Bhawani Mata Chalisa

तारा भवानी चालीसा का संपूर्ण पाठ पढ़ें। जानें तारा भवानी चालीसा का महत्व, लाभ और पाठ करने का सही तरीका, साथ ही PDF आसानी से डाउनलोड करें।

॥ तारा भवानी चालीसा ॥

तारा भवानी माता को समर्पित यह चालीसा भक्तों के लिए श्रद्धा और भक्ति का एक सुंदर माध्यम है। माना जाता है कि माता का नियमित पाठ मन को शांति देता है और जीवन में आने वाली परेशानियों का सामना करने का साहस बढ़ाता है।

॥ दोहा ॥

श्री गणपति गुरु गौरी, पूजिहउं सिर नाइ।
तारा बल जल सोखनि, बिमल विद्या दाइ॥

॥ चालीसा ॥

नमो नमो तारा जगदम्बा।
तुम बिन होत न होई अम्बा॥

जय हेमवती जय जगदम्बे।
जय अचला जय दुर्गे अम्बे॥

शिवशंकर की तुम हो प्यारी।
करहुं कृपा मति हो संहारी॥

जय गायत्री वेद की माता।
तुम बिन काहु न सुघर विधाता॥

ब्रह्मा विष्णु महेश सवारी।
तीनों देव तुम्हारे पुजारी॥

करहुं दया मति ममता भारी।
हम सबकी तुम हो हितकारी॥

सृष्टि पालन तुम्हारे बस में।
तुम्ह बिन कहुं न दूजा जग में॥

रक्षक हो तुम परम विशाल।
तुम्हरा कृपा सदा सुफल॥

शरणागत की तुम हो माता।
कृपा करो अम्बे विघ्न हटा॥

शत्रु विनाशिनी मति हो माती।
तुम्ह बिन पूर्ण कहुं नहि पाती॥

भव सागर सब पार करावे।
तारा भवानी कृपा बरसावे॥

संत जनों की तुम हो प्यारी।
तुम्ह बिन होत न कोई भिखारी॥

रिद्धि सिद्धि की तुम हो दाता।
विपत्ति हरो सबकी विधाता॥

दीन हीन के दुख हरणी।
तुम हो सबकी अधिपति मरणी॥

अघट की तुम हो महिमा भारी।
तुम बिन सृष्टि न कोई उधारी॥

शरणागत को ना तजना।
तुम बिन कौन करू उद्धार॥

कृपा दृष्टि करहुं हम पर।
सुख संपत्ति होय घर घर॥

दया करो अब तुम मति मारी।
हम पर अम्बे कृपा उतारी॥

॥ दोहा ॥

शरणागत की रक्षा करु, दुष्ट दलन कर पाय।
तारा भवानी मति मति, संकट दूर कराय॥

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