बजरंग बाण पाठ लिरिक्स | Bajarang Ban Path Lyrics
हनुमान जी के सभी पाठों में बजरंग बाण को सबसे तेज असर करने वाला माना जाता है, लेकिन इसके साथ एक बात हमेशा कही जाती है—इसे सही उच्चारण और सही नियमों के साथ ही पढ़ना चाहिए।
अगर आप आज इसका पाठ करने बैठे हैं, तो बिल्कुल सही जगह आए हैं। इस पोस्ट में आपको न सिर्फ बजरंग बाण के शुद्ध लिरिक्स मिलेंगे, बल्कि इसका सही अर्थ और पाठ करने की सही विधि भी जानने को मिलेगी, जिससे आपकी पूजा पूरी तरह फलदायी रहे।
श्री बजरंग बाण
दोहा
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान। तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करें हनुमान॥
जय हनुमन्त संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
जन के काज बिलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महासुख दीजै॥
जैसे कूदी सिन्धु महि पारा। सुरसा बदन पैठी विस्तारा॥
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका॥
जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम-पद लीना॥
बाग उजारि सिन्धु मह बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा॥
अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥
लाह समान लंक जरि गई। जय-जय धुनि सुरपुर में भई॥
अब बिलम्ब केहि कारन स्वामी। कृपा करहु उर अन्तर्यामी॥
जय जय लखन प्रान के दाता। आतुर होई दु:ख करहु निपाता॥
जै गिरिधर जै जै सुख सागर। सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥
ओम हनु हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहि मारु बज्र की कीले॥
गदा बज्र लै बैरिहि मारो। महाराज प्रभु दास उबारो॥
ओंकार हुंकार महाप्रभु धाओ। बज्र गदा हनु विलम्ब न लाओ॥
ओम ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा। ओम हुं हुं हुं हनु अरि उर-सीसा॥
सत्य होहु हरी शपथ पायके। राम दूत धरु मारू जायके॥
जय जय जय हनुमन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा॥
पूजा जप-तप नेम अचारा। नहिं जानत हो दास तुम्हारा॥
वन उपवन मग गिरि गृह मांहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं॥
पायं परौं कर जोरी मनावौं। येहि अवसर अब केहि गोहरावौं॥
जय अंजनी कुमार बलवंता। शंकर सुवन वीर हनुमंता॥
बदन कराल काल कुलघालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक॥
भूत प्रेत पिसाच निसाचर। अगिन वैताल काल मारी मर॥
इन्हें मारु, तोहि शपथ राम की। राखउ नाथ मरजाद नाम की॥
जनकसुता हरि दास कहावो। ताकी शपथ विलम्ब न लावो॥
जै जै जै धुनि होत अकासा। सुमिरत होत दुसह दुःख नासा॥
चरण शरण कर जोरि मनावौं। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं॥
उठु उठु चलु तोहि राम-दोहाई। पायँ परौं, कर जोरि मनाई॥
ओम चं चं चं चं चपल चलंता। ओम हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता॥
ओम हं हं हाँक देत कपि चंचल। ओम सं सं सहमि पराने खल-दल॥
अपने जन को तुरत उबारौ। सुमिरत होय आनंद हमारौ॥
यह बजरंग बाण जेहि मारै। ताहि कहो फिर कोन उबारै॥
पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करैं प्रान की॥
यह बजरंग बाण जो जापैं। ताते भूत-प्रेत सब कापैं॥
धूप देय अरु जपै हमेशा। ताके तन नहिं रहै कलेसा॥
दोहा
प्रेम प्रतीतिहि कपि भजै, सदा धरै उर ध्यान। तेहि के कारज सकल सुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥
बजरंग बाण पाठ की सही विधि: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
हनुमान जी बहुत सीधे और सरल देवता हैं—उन्हें आडंबर नहीं, बस आपका सच्चा भाव चाहिए। लेकिन जब बात बजरंग बाण की हो, तो थोड़ा अनुशासन रखना जरूरी होता है। अगर आप पहली बार पाठ कर रहे हैं, तो इस आसान तरीके से शुरुआत करें:
1. सही दिन और समय का चुनाव
दिन: पाठ शुरू करने के लिए मंगलवार या शनिवार सबसे शुभ माने जाते हैं।
समय: सबसे बेस्ट समय सुबह 4 से 6 बजे (ब्रह्म मुहूर्त) का होता है, जब घर और मन दोनों शांत रहते हैं। अगर सुबह मुमकिन न हो, तो शाम को सूर्यास्त के बाद (गोधूलि बेला में) पाठ करें।
2. पूजा की छोटी-सी तैयारी
नहा-धोकर साफ, धुले हुए कपड़े पहनें। लाल, केसरी या हल्के पीले कपड़े पहनना सबसे अच्छा रहता है।
जमीन पर बैठने के लिए ऊनी या कुश का आसन बिछाएं (सीधे ठंडी जमीन पर न बैठें)।
एक छोटी चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर हनुमान जी की तस्वीर या मूर्ति रखें। अगर तस्वीर में राम-लक्ष्मण और सीता माता भी हों, तो यह बहुत शुभ माना जाता है।
उनके आगे चमेली के तेल या शुद्ध घी का दीपक जलाएं और अगरबत्ती लगाएं।
हनुमान जी को थोड़ा सा सिंदूर, लाल फूल, तुलसी पत्ता और गुड़-चने या बूंदी का भोग लगाएं।
3. संकल्प: जो पाठ को शक्ति देता है
बिना संकल्प के पूजा का पूरा फल नहीं मिलता। अपने सीधे हाथ में थोड़ा सा पानी, कुछ दाने चावल (अक्षत) और एक सिक्का लें। मन ही मन कहें—
"हे पवनपुत्र हनुमान जी, मैं (अपना नाम बोलें) आज से आपके बजरंग बाण का पाठ अपनी इस समस्या (अपनी परेशानी बोलें) को दूर करने के लिए शुरू कर रहा हूँ। मेरे इस प्रयास को स्वीकार करें और रक्षा करें।"
इसके बाद वह पानी जमीन पर छोड़ दें।
4. पाठ कैसे और कितनी बार करें?
पाठ शुरू करने से पहले एक बार "श्री गणेशाय नमः" और तीन बार "जय श्री राम" का स्मरण करें।
इसके बाद शांत मन से बजरंग बाण पढ़ना शुरू करें।
इसे आप 1, 7, 11 या 21 बार अपनी क्षमता के अनुसार पढ़ सकते हैं। अगर शुरुआत कर रहे हैं, तो रोज 1 या 7 बार पढ़ना बिल्कुल सही रहेगा।
पाठ खत्म होने पर कपूर से हनुमान जी की आरती करें और अनजाने में हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा मांग लें।
वो सावधानियां जो लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं
बजरंग बाण कोई साधारण भजन या मंत्र नहीं है। इसमें हनुमान जी को भगवान राम की शपथ (राम दुहाई) दिलाई जाती है। इसलिए इसे करते वक्त ये 3 बातें हमेशा दिमाग में रखें:
छोटी-मोटी बातों के लिए पाठ न करें: चाबी खो गई, बस छूट गई या किसी से हल्की बहस हो गई—ऐसी रोजमर्रा की बातों के लिए बजरंग बाण न पढ़ें। सामान्य दिनों में रोज पढ़ने के लिए हनुमान चालीसा सबसे बेस्ट है। बजरंग बाण तभी उठाएं जब कोई बड़ी मानसिक परेशानी, गंभीर डर या काम में भारी अड़चन आ रही हो।
सात्विक दिनचर्या रखें: जितने दिन का आपने संकल्प लिया है (जैसे 11 दिन या 21 दिन), उतने दिन घर और खाने में सात्विकता रखें। शराब, नॉन-वेज और अत्यधिक तामसिक चीजों से दूर रहें और अपने आचरण में संयम रखें।
जल्दबाजी बिल्कुल न करें: कई लोग 5 मिनट में पाठ खत्म करने के चक्कर में शब्दों को गलत पढ़ जाते हैं। धीरे-धीरे और साफ आवाज में पढ़ें। उच्चारण की शुद्धता ही इस पाठ का असली सार है।
बजरंग बाण पढ़ने से जीवन में क्या बदलाव आते हैं?
जब आप पूरे नियम और श्रद्धा से यह पाठ करते हैं, तो इसके परिणाम खुद महसूस होते हैं:
अंदर का डर और घबराहट खत्म होना: अगर आपको रात में बुरे सपने आते हैं, अकेले रहने से डर लगता है या बिना किसी वजह के दिल घबराता है, तो इसका पाठ मन में गजब की निडरता और शांति भर देता है।
नेगेटिव एनर्जी और नजर दोष से सुरक्षा: कई बार घर में अजीब-सी भारीपन की भावना होती है या हर काम बनते-बनते बिगड़ने लगता है। बजरंग बाण का सुरक्षा कवच किसी भी तरह की नकारात्मक ऊर्जा को टिकने नहीं देता।
लंबे समय से अटके कामों में गति: अगर कोई कोर्ट-कचहरी, प्रॉपर्टी या करियर से जुड़ा काम सालों से अटका हुआ है और कोई रास्ता नहीं दिख रहा, तो नियमपूर्वक इसका पाठ करने से नए रास्ते खुलते नजर आते हैं।
शनि और भारी ग्रहों का प्रभाव कम होना: अगर कुंडली में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का तनाव चल रहा है, तो मंगलवार-शनिवार को यह पाठ करने से मानसिक दबाव काफी हल्का हो जाता है।
आत्मविश्वास (Confidence) में बढ़ोतरी: इस पाठ की सबसे बड़ी खूबी यही है कि यह व्यक्ति को अंदर से मजबूत बनाता है, जिससे बड़ी से बड़ी मुसीबत से लड़ने का हौसला मिलता है।
बजरंग बाण पाठ लिरिक्स | Bajarang Ban Path Lyrics
Ram Shalaka
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श्री बजरंग बाण
दोहा
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान। तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करें हनुमान॥
जय हनुमन्त संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
जन के काज बिलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महासुख दीजै॥
जैसे कूदी सिन्धु महि पारा। सुरसा बदन पैठी विस्तारा॥
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका॥
जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम-पद लीना॥
बाग उजारि सिन्धु मह बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा॥
अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥
लाह समान लंक जरि गई। जय-जय धुनि सुरपुर में भई॥
अब बिलम्ब केहि कारन स्वामी। कृपा करहु उर अन्तर्यामी॥
जय जय लखन प्रान के दाता। आतुर होई दु:ख करहु निपाता॥
जै गिरिधर जै जै सुख सागर। सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥
ओम हनु हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहि मारु बज्र की कीले॥
गदा बज्र लै बैरिहि मारो। महाराज प्रभु दास उबारो॥
ओंकार हुंकार महाप्रभु धाओ। बज्र गदा हनु विलम्ब न लाओ॥
ओम ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा। ओम हुं हुं हुं हनु अरि उर-सीसा॥
सत्य होहु हरी शपथ पायके। राम दूत धरु मारू जायके॥
जय जय जय हनुमन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा॥
पूजा जप-तप नेम अचारा। नहिं जानत हो दास तुम्हारा॥
वन उपवन मग गिरि गृह मांहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं॥
पायं परौं कर जोरी मनावौं। येहि अवसर अब केहि गोहरावौं॥
जय अंजनी कुमार बलवंता। शंकर सुवन वीर हनुमंता॥
बदन कराल काल कुलघालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक॥
भूत प्रेत पिसाच निसाचर। अगिन वैताल काल मारी मर॥
इन्हें मारु, तोहि शपथ राम की। राखउ नाथ मरजाद नाम की॥
जनकसुता हरि दास कहावो। ताकी शपथ विलम्ब न लावो॥
जै जै जै धुनि होत अकासा। सुमिरत होत दुसह दुःख नासा॥
चरण शरण कर जोरि मनावौं। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं॥
उठु उठु चलु तोहि राम-दोहाई। पायँ परौं, कर जोरि मनाई॥
ओम चं चं चं चं चपल चलंता। ओम हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता॥
ओम हं हं हाँक देत कपि चंचल। ओम सं सं सहमि पराने खल-दल॥
अपने जन को तुरत उबारौ। सुमिरत होय आनंद हमारौ॥
यह बजरंग बाण जेहि मारै। ताहि कहो फिर कोन उबारै॥
पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करैं प्रान की॥
यह बजरंग बाण जो जापैं। ताते भूत-प्रेत सब कापैं॥
धूप देय अरु जपै हमेशा। ताके तन नहिं रहै कलेसा॥
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प्रेम प्रतीतिहि कपि भजै, सदा धरै उर ध्यान। तेहि के कारज सकल सुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥
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